12/15/2016

अपने आक्रामक तेवर से हमेशा विपक्ष को बैकफुट पर ला देने वाली केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार खुद ‘बैकफुट’ पर

अपने आक्रामक तेवर से हमेशा विपक्ष को बैकफुट पर ला देने वाली केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार खुद ‘बैकफुट’ पर आती जा रही है। अव्यवस्थित नोटबंदी की वजह से एक साथ कई समस्याओं से घिरी सरकार पर कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी का जुबानी हमला पीएम नरेन्द्र मोदी के सियासी ग्राफ को नीचे की ओर खिसका रहा है और सीधे तौर पर सरकार और उसके चिंतकों के लिए चिंता का विषय है।
दरअसल, 8 नवंबर को नोटबंदी के बाद से ही पूरे देश में अफरा-तफरी है। 16 नवंबर से संसद का शीतकालीन-सत्र चल रहा है, लेकिन शायद ही कोई दिन हो, जिस दिन सदन की कार्रवाई सुचारू रूप से चली हो। नोटबंदी पर संसद में हंगामे के बीच 9 नवंबर को भी राज्यसभा व लोकसभा के कामकाज में रुकावट आई। संसद के बाहर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने मीडिया से कहा कि सरकार बहस से भाग रही है, अगर मुझे बोलने देंगे तो आप देखेंगे कि भूकंप आ जाएगा। उन्होंने कहा कि नोटबंदी हिंदुस्तान के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला है। नोटबंदी पर संसद के शीतकालीन-सत्र में केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश कर रही विपक्षी पार्टियां प्रधानमंत्री के बयान की मांग कर रही हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कांग्रेस उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री पूरे देश में तो भाषण दे रहे हैं, मगर लोकसभा में आने से डरते हैं। आखिर इतनी घबराहट क्यों? एक महीने से हम विमुद्रीकरण पर बहस की कोशिश कर रहे हैं, हम चाहते हैं दूध का दूध पानी का पानी हो जाए। राजनीति के जानकार बताते हैं कि राहुल का यही सवाल सरकार से जुड़े लोगों को परेशान कर रहा है, और यह समझ से परे है कि आखिर मोदी सदन में आने से क्यों कतरा रहे हैं?

बड़े नोटों को अमान्य करने के ऐलान के एक महीना (8 नवम्बर) पूरा होने पर विपक्ष ने संसद और संसद के बाहर ‘काला दिवस’ मनाया। संसद परिसर में महात्मा गांधी की मूर्ति के पास सांसदों ने प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में शामिल कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर तीखा हमला करते हुए कहा कि उनके मूर्खतापूर्ण फैसले ने देश को बर्बाद कर दिया है। प्रधानमंत्री संसद में जवाब देने से बच रहे हैं, लेकिन हम लोग उन्हें भागने नहीं देंगे। संसद में चर्चा में प्रधानमंत्री हिस्सा लें, सभी चीजें स्वत: स्पष्ट हो जाएंगी। विमुद्रीकरण के फैसले ने मजदूरों और किसानों को बर्बाद कर दिया है। हम बहस चाहते हैं, वोटिंग चाहते हैं। लेकिन सरकार ऐसा नहीं चाहती। राहुल गांधी ने कहा कि लोकसभा में मैं सब बता दूंगा कि पेटीएम कैसे पे टू मोदी हो जाता है। पिछले एक महीने से इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री अपनी बातें बदल रहे हैं। लोग कठिनाइयों के बोझ में दबते जा रहे हैं। प्रधानमंत्री मुस्करा रहे हैं। वह अच्छा समय व्यतीत कर रहे हैं, जबकि देश की जनता परेशान है, इसलिए वे एक मुद्दे से दूसरे मुद्दे पर जा रहे हैं। हम उन्हें सदन में घेरेंगे। वे सदन से भाग नहीं पाएंगे।
इस प्रकार आप देखेंगे कि सत्तापक्ष के अक्रामक रूख के कारण हमेशा कथित रक्षात्मक रुख अपनाने वाले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी आक्रामक हैं, और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत उनकी पूरी जम्बोजेट कैबिनेट रक्षात्मक मुद्रा में नजर आ रही है। निश्चित रूप से प्रधानमंत्री के बारे में लोगों के मन में जो छवि बनी थी, वह धीरे-धीरे खत्म हो रही है।
दरअसल, विपक्ष का आरोप है कि नोटबंदी की घोषणा को चुनिंदा तरीके से लीक किया गया, जिन लोगों को उन्हें बताना था, उन्हें बता दिया गया था। यदि मामले लीक नहीं हुए होते तो भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई ने बैंकों में करोड़ों रुपये जमा किए, पार्टी ने बिहार में जमीन खरीदी, ये सब नहीं हो पाता। कर्नाटक में भाजपा सरकार में पूर्व मंत्री रहे एक नेता ने अपनी पुत्री के विवाह में 500 करोड़ रुपए खर्च किए। नोटबंदी के कारण हजारों की संख्या में लोगों की नौकरियों से छंटनी हो रही है। किसान मर रहे हैं। अब तक 100 से अधिक लोग कतारों में मर चुके हैं।
आपको बता दें कि 8 नवम्बर को हुई नोटबंदी का मकसद कालेधन पर चोट करना था, लेकिन सरकार को इसमें कोई कामयाबी नहीं मिल सकी है। कालेधन वालों ने देश की कथित भ्रष्ट बैंकिग सिस्टम से सेटिंग कर अपने पुराने नोट को बदल लिया। जबकि आम जनता नोटबंदी के एक माह बाद तक कतार में खड़ी होकर धक्के खा रही है और सरकार को कोस रही है। नोटबंदी के बाद से आम लोगों को काफ़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार कहती है कि नोटबंदी की वजह से साढ़े ग्यारह लाख करोड़ रुपए बैंकों में जमा हो गए। इसमें से चार लाख करोड़ रुपए बैंकों ने लोगों को दे दिए। इस हिसाब से बैंकों के पास साढ़े सात लाख करोड़ रुपए जमा हो गए। सरकार के पास पैसे आ गए, पर लोगों के पास नहीं रहे।

बताते हैं कि नोटबंदी का जीडीपी पर तीन तरह से असर पड़ेगा। भारत का कालाधन अब विदेश चला जाएगा, क्योंकि लोगों के मन में डर बन गया है। लोग डॉलर खरीदने लगे हैं, इसका सबूत यह है कि डॉलर के मुक़ाबले रुपया लगातार टूट रहा है। छोटे उद्योगों को भी नकद न होने से दिक्कतें हो रही है। आशंका है कि भारतीय अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में आ सकती है।
खैर, पांच सौ, हजार रुपए की नोटबंदी के अच्छे नतीजे तो जाने कब दिखाई देंगे, मगर उसके खराब पहलू पूरी तरह सामने आ गए हैं। दावे के हिसाब से न कालाधन पकड़ा गया न ही भ्रष्टाचार में कोई कमी आई है। मकान-दुकान आदि के सस्ते होने की बात कही गई थी, बैंकों के कर्ज की ब्याज-दरों में कमी आने का भी दावा था, मगर ऐसा कुछ खास नहीं हुआ है। रिजर्व बैंक ने अपनी ताजा मौद्रिक नीति में ब्याज दरें यथावत रखी हैं और विकास दर का अनुमान घटा दिया है। मगर प्रधानमंत्री दिवास्वप्न दिखाए जा रहे हैं।
नोटबंदी का सबसे बड़ा कहर आम आदमी पर टूटा है, चाहे वह शहरी हो या ग्रामीण। बैंकों और एटीएम के सामने दो-चार हजार रुपए निकालने के लिए लग रही कतारें टूटने का नाम नहीं ले रहीं। राहत की सरकारी घोषणाओं और उनके अमल में कोई तालमेल नहीं है। सरकार का कहना है कि कोई भी खाताधारक एक हफ्ते में बैंक से चौबीस हजार और एटीएम से एक दिन में ढाई हजार रुपए निकाल सकता है, मगर बैंकों और एटीम में जब पैसे ही नहीं होते, तो इस फरमान का क्या मतलब है?

इधर, केन्द्र सरकार की नाकामी पर विपक्ष को उस वक्त और बल मिल गया जब सत्तारूढ़ भाजपा के वरिष्ठ सांसद लालकृष्ण आडवाणी ने संसद ठप्प रहने पर सरकार को घेरा। आडवाणी ने सदन बाधित होने पर लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन और संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार को ठहराया। आडवाणी अपने वाणी-संयम के लिए विख्यात हैं, फिर भी लोकसभा अध्यक्षा सुमित्रा महाजन की आलोचना करनी पड़ी।
उधर, इस मसले पर सोशल मीडिया पर जबर्दस्त गर्माहट दिख रही है। दिल्ली कांग्रेस आईटी सेल के कन्वेनर विशाल कुन्द्रा फेसबुक, ट्वीटर और व्हाट्स एप्प के जरिए ताबड़तोड़ हमले कर रहे हैं। बिना तैयारी की गई नोटबंदी को जनविरोधी करार देते हुए ट्वीटर पर विशाल कुन्द्रा लिखते हैं-‘इस सरकार ने देश के आम नागरिकों का निवाला छीन लिया है।’
दरअसल, नोटबंदी के मुद्दे पर संसद में प्रधानमंत्री के बयान देने की मांग लेकर विपक्ष द्वारा हंगामा किया जा रहा है। जबकि भाजपा बहस तो चाहती है लेकिन नोटबंदी पर मतदान नहीं चाहती। वजह स्पष्ट है कि यदि मतदान होगा तो राज्यसभा में सरकार निश्‍चित ही हार जाएगी, जबकि विपक्ष मतदान पर जोर दे रहा है। बहरहाल, सरकार का डर विपक्ष के आरोप के अनुसार किसी बड़े घपले-घोटाले की ओर इशारा कर रहा है। वैसे सच्चाई का पता तो तब चलेगा जब प्रधानमंत्री जिद छोड़कर सदन में आएं और बहस में हिस्सा लें, जो सम्भव होता नहीं दिख रहा है।

12/13/2016

मोदी सरकार ने दबा रखी है दलित छात्रों की 8,000 करोड़ की छात्रवृत्ति

देश में अनुसूचित जाति के मेधावी छात्रों की स्कॉलरशिप के 8000 करोड़ रुपए मोदी सरकार पर बकाया हैं। शोसल जस्टिस एवं एम्पॉवरमेंट मिनिस्ट्री को यह रकम चुकानी है। लेकिन यह उसके सालाना योजनागत खर्च से भी अधिक है। मेधावी छात्रों के लिए मैट्रिक के बाद स्कॉलरशिप केंद्र की प्राथमिकता वाली योजनाओं में से एक है। इसके तहत छात्रों की ओर से किए गए खर्च के लिए सहायता दी जाती है।

आपके बता दें कि देश की राज्य सरकारें विभिन्न योजनाओं के तहत अनुसूचित जाति के मेधावी छात्रों को मैट्रिक के बाद स्कॉलरशिप देती हैं। इस रकम की भरपाई केंद्र सरकार की सोशल जस्टिस एंड एम्पावरमेंट मिनिस्ट्री की ओर से की जाती है। अनुसूचित जातियों के कल्याण के जुड़ी योजनाओं के लिए यह नोडल मिनिस्ट्री है।

केंद्र सरकार पिछले कुछ समय से अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए इस स्कॉलरशिप की रकम को रिअम्बर्स करने में नाकाम रही है और अब बकाया रकम बढ़कर 8,000 करोड़ पहुंच गई है। राज्यों को इस वर्ष के लिए बकाया रकम का अभी तक भुगतान नहीं किया गया है। इसके अलावा पिछले वर्ष की बकाया रकम को चुकाने के लिए अतिरिक्त फंड की जरूरत है।


सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने इस बाबत इकनॉमिक टाइम्स से बात करते हुए कहा, 'हम इस समस्या को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं। सिस्टम में सुधार के लिए राज्यों से बात की जा रही है। उन्हें डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर के जरिए स्कॉलरशिप का भुगतान करना चाहिए। इसके अलावा राज्यों को विभिन्न इंस्टीट्यूशंस की फीस में बड़े अंतर पर भी विचार करने की जरूरत है।'

गहलोत ने कहा कि स्कॉलरशिप का मुद्दा वित्त मंत्रालय के सामने उठाया गया है। सोशल जस्टिस एंड एम्पावरमेंट मिनिस्ट्री का योजनागत बजट 6,500 करोड़ रुपए का है। इसमें से 4,667 करोड़ रुपए सितंबर के अंत तक जारी कर दिया है। लेकिन, स्कॉलरशिप की 8,000 करोड़ रुपए बकाया रकम को चुकाने के लिए अतिरिक्त फंड आवंटित करने की जरूरत है।

8,000 करोड़ रुपए में से 5,400 करोड़ रुपए 2015-16 के फाइनेंशियल ईयर तक का एरियर है और यह मौजूदा फाइंनेंशियल ईयर के लिए जरूरत का एक तिहाई है। एरियर को चुकाने के लिए एक्सपेंडिचर फाइंनेंस कमेटी को एक नोट भेजा गया है। सोशल जस्टिस एंड फाइंनेंस मिनिस्ट्री ने फाइंनेंस मिनिस्ट्री से कहा है कि 5,400 करोड़ रुपए तुरंत जारी करने की जरूरत है।

इस बारे में एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना था, स्कॉलरशिप स्कीम के तहत अधिक खर्च की वजह फ्रॉड भी है क्योंकि एक व्यक्ति दो-तीन जगहों से स्कॉलरशिप ले रहा है। मिनिस्ट्री ने राज्यों से डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर के जरिए स्कॉलरशिप देने को कहा है। इससे वास्तविक मेधावी छात्रों को स्कॉलरशिप देना सुनिश्चित किया जा सकेगा।

12/08/2016

सिर्फ एक महीने में पेट अंदर करे


सिर्फ 29 दिन में करें तोंद अंदर

तोंद को अंदर करना या पेट और कमर की चर्बी घटाना कोई मुश्किल काम नहीं। यह बहुत आसान है। लेकिन व्यक्ति के भीतर संकल्प और मन को काबू में करने की इच्छाशक्ति नहीं है इसलिए यह कार्य बहुत ही मुश्किल नजर आता है।

अब हम आपको बताएंगे कि किस तरह योग के मात्र एक आसन से आप अपनी तोंद को आश्चर्यजनक रूप से 29 दिन में पूरी तरह से समाप्त कर सकते हैं। बस, चाहिए दृढ़ इच्छाशक्ति… तो क्या करना होगा आपको? आगे पढ़िए आसन को बताने से पूर्व कुछ जरूरी हिदायत

यदि आप किसी गंभीर रोग से ग्रस्त हैं, पेट संबंधी किसी बीमारी से जूझ रहे हैं या आप रीढ़ संबंधी रोग से ग्रस्त हैं, तो आप यह आसन कतई न करें। अगर आपकी पीठ या कंधों में चोट हो या आप उच्च रक्तचाप के शिकार हों तब भी यह आसन न करें।

यदि आप चाय, कॉफी, रोटी, मटन, चिकन, फास्ट फूड, जंक फूड, नूडल्स, सॉफ्ट ड्रिंक, सोडा, सेव, मैदे, बेसन, दूध आदि से बने हुए खाद्य पदार्थ छोड़ने के लिए तैयार हैं तो यह आसन आपके लिए है। आपको मात्र 29 दिनों तक ज्यूस, फल, सब्जी, ड्राय फ्रूट और स्मूदी का सेवन ही करना होगा।

आप पेट साफ करने के लिए इसबगोल की भूसी का सेवन करें, प्रतिदिन नींबू रस पीएं या इसी तरह के किसी प्राकृतिक उपाय को अपनाएं। यह इसलिए कि आपके पेट को पहले नरम बनाना जरूरी है तभी यह अंदर हो पाएगा।

कुंभकासन (Kumbhkasana) : कुंभकासन और चतुरंग दंडासन के मिले-जुले रूप को आजकल पश्‍चिम में प्लंक (plank) कहा जाता है। प्लंक को हिन्दी में काष्ठफलक कहा जाता है। प्लंक के नाम से योगासन ही किए जाते हैं। इस आसन को फलकासन कहते हैं जो सूर्य नमस्कार की एक स्टेप है।

यह आसन देखने में आसान है, लेकिन करने में कठिन। इसे योग का सबसे असरदार आसन माना जाता है। 1 से 2 मिनट के लिए आप प्लंक या फलकासन मुद्रा में नहीं रह सकते हैं, लेकिन आपको शुरुआत में 1 मिनट रहना चाहिए। फिर धीरे-धीरे आप समय बढ़ाएं और इसे 5 मिनट तक ले जाएं। चित्र में दिखाए गए सबसे नीचे वाला चित्र प्लंक योगासन है। आप इसी मुद्रा में पहले 10 सेकंड फिर समय बढ़ाते हुए एक मिनट तक स्थिर रहें। पुनश्च: कि फिर धीरे-धीरे आप समय बढ़ाएं और इसे 5 मिनट तक ले जाएं।
आप प्लंक योग नहीं कर पाए तो कुंभकासन योग करें जो चित्र में दिखाए गए पहले नंबर का चित्र है।

विधि : सबसे पहले शवासन में सोते हुए मकरासन में लेट जाएं। अब अपनी कोहनी और हाथ के पंजे को भूमि कर रखें। फिर छाती, पेट, कम और पुष्ठिका को उपर उठाते हुए पैर के पंजे सीधे कर दें। इस स्थिति में आपके शरीर का बल या वजन पूर्णत: हाथ के पंजे, कोहनी और पैर के पंजों पर आ जाएगा। अप गर्दन सहित रीढ़ की हड्डी को सीधा करें। इस स्थिति में रीढ़ सीधी रेखा में होना चाहिए। बिल्कुल एक लकड़ी का तख्ते या पल्ले जैसी।

इस तरह की समझे : चटाई पर पेट के बल लेट जाएं। अब अपनी हथेलियों को अपने चेहरे के आगे रखें और पैरों को इस तरह मोड़ें कि पंजे जमीन को धकेल रहे हों। अब हाथ को आगे की तरफ पुश करें और अपनी पुष्टिका को हवा में उठाएं। आपके पैर जमीन से यथासंभव सटे होने चाहिए और गर्दन ढीली होनी चाहिए। इसे अधोमुख स्वानासन के नाम से भी जाना जाता है। यहां तक पहुंचने के बाद सांस अंदर लें और अपने धड़ को इस तरह नीचे ले जाएं कि आपकी बांहों का बल जमीन पर लग रहा हो ताकि आपकी छाती और कंधे, सीधा उन पर टिके हों। इस मुद्रा में तब तक रहें, जब तक कि सहज हो। आसन से बाहर आने के लिए सांस छोड़ें और आराम से शरीर को फर्श पर लेटने दें।
अब यदि आप चाहें तो भुजंगासन, शलभासन, नौकासन, उष्ट्रासन, धनुरासन भी कर सकते हैं। उत्तम भोजन के साथ यदि आप यह आसन 29 दिनों बाद भी जारी रखेंगे तो जीवन में कभी तोंद नहीं निकलेगी और कभी किसी भी प्रकार का रोग नहीं होगा। आपकी काया निरोगी बनी रहेगी।

ये आपकी बाहों, कंधों, पीठ, पुष्टिकाओं, जंघाओं को तो मजबूत करेगा ही सही, साथ ही यह बहु‍त तेजी से आपके पेट और कमर की चर्बी को हटाकर तोंद को समाप्त कर देगा। शरीर में मजबूत एब्स के लिए यह आसन बेहतरीन है।

यह आसन पेट और गुदा संबंधी कई रोग में लाभदायक है। इससे सेक्स पॉवर में बढ़ोतरी होती है। छाती, फेंफड़े और लिवर मजबूत को यह आसन मजबूत करता है।

मूत्र विकार में भी यह आसन आपकी सहायता करता है। किडनी संबंधी रोग में भी यह लाभदायक है। पाचन क्रिया इससे मजबूत होती है और कब्ज जैसी बीमारियों दूर हो जाती है।

12/05/2016

प्रधानमंत्री मोदी ने माना, नोटबंदी बहुत बड़ी भूल थी

प्रधानमंत्री मोदी ने माना, नोटबंदी बहुत बड़ी भूल थी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव (केसीआर) के साथ 19 नवंबर को एक मीटिंग में कहा कि बिना सोचे समझे नोटबंदी द्वारा 1000 और 500 के नोटो को बंद करके उन्होने एक बहुत बड़ी भूल कर दी।

नरादा की खबर के अनुसार, चंद्रशेखर राव पीएम से नोटबंदी के बाद तेलंगाना में नए नोट ना होने से हो रही भारी परेशानी बताने के लिए मिले थे। नोटबंदी के बाद से तेलंगाना के हालात बहुत खराब थे जिसका असर हैदराबाद समेत पूरे राज्य पर पड़ रहा था। पुराने नोट बदलने के लिए कतारों में बहुत लोग खड़े थे जिसके बाद से पैसा बहुत जल्दी खत्म हो रहा था।

मोदी और चंद्रशेखर के बीच मीटिंग 25 मिनट के लिए होनी तय थी। लेकिन ये मीटिंग पूरे एक से डेढ़ घंटे के लिए चली चंद्रशेखर राव ने कहा कि औद्योगिक और कृषि क्षेत्रों में स्थिति बुरी तरह से प्रभावित हो रही थी।

चंद्रशेखर ने पीएम से तेलंगाना में इस तरह के एक अनिश्चित स्थिति को देखते हुए कहा कि, राज्य केंद्र को करों और अन्य राजस्व के अपने हिस्से का भुगतान करने में सक्षम नहीं होगा।

चंद्रशेखर द्वारा की गई सूचीबद्ध शिकायतों के बाद प्रधानमंत्री ने स्वीकार किया नोटबंदी अपने आप में एक बड़ी भूल थी। और उन्हे इसे शुरू करने से पहले बहुत अधिक ध्यान देना चाहिए था। एक सूत्र ने इस मीटिंग के बारे में बताया कि हालांकि प्रधानमंत्री ने कहा कि चीजें जल्दी ही सुधरनी चाहिए।

प्रधानमंत्री ने चंद्रशेखर से नोटबंदी को सार्वजनिक रूप से इस कदम का समर्थन करने को कहा। मोदी ने चंद्रशेखर को आश्वासन दिया कि नितिन गडकरी, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री, और पीयूष गोयल, बिजली मंत्री, संकट से उबरने में मदद करने के लिए राज्य में नई परियोजनाओं की घोषणा करेंगे।

मोदी और चंद्रशेखर राव की बैठक इतनी लंबी चली कि पीएम से मिलने का इंतज़ार कर रहे सेना प्रमुख जनरल दलबीर सुहाग को कहा गया कि कुछ जरूरी परिस्थितियों के कारण प्रधानमंत्री से मिलना संभव नहीं है।

ये पहला अवसर है जब मोदी ने नोटबंदी पर अपनी गलती स्वीकरा की है। वरना प्रधानमंत्री मोदी ने सार्वजनिक रूप से नोटबंदी का पूरी तरह से बचाव किया है। इस कदम के खिलाफ विरोध करने वालों को पीएम ने भष्ट्र कहकर पुकारा है ।

इजरायल से एक शीर्ष अर्थशास्त्री, जो प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकारों में है, उन्होंने मोदी से कहा था कि निर्णय काफी गलत था। कई भारत और विदेश के विशेषज्ञों ने निर्णय की निंदा की है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नोटबंदी घोषणा पर अभूतपूर्व कवरेज सिर्फ भारतीय मीडिया तक ही सीमित नहीं थी। 500 रुपये और 1000 रुपये के नोटों को बंद करने के इस कदम का दुनिया भर की मीडिया कवरेज में बोलबाला रहा है।

टीवी चैनलों ने बड़े पैमाने पर इस खबर को कवर किया लंदन के समाचार पत्र, न्यूयॉर्क और वाशिंगटन ने अपने संपादकीय में नोटबंदी के लिए कटु लेख लिखे थे।

लंदन के दा गार्जियन अखबार ने इस कदम को तानाशाही का एक असफल प्रयोग बताया, ब्लूमबर्ग ने इसे मोदी की एक भारी गलती करार दिया।

यहाँ इन विदेशी मीडिया की टिप्पणियों के संपादकीय का एक स्नैपशॉट है।

लंदन दा गार्जियन

अमीर को इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा, काला धन का अधिकतर भाग शेयर, सोना और रियल एस्टेट के रुप में परिवर्तित कर दिया है। लेकिन गरीब, जो देश की 1.3 अरब लोगों की आबादी में हैं सबसे अधिक प्रभावित होंगे। जिनके आम तौर पर बैंक खाते नहीं है और अक्सर नकद में भुगतान करते हैं। इस नीति के एक हफ्ते के अंदर ही कम से कम एक दर्जन से अधिक लोगों की जान जाने का दावा किया गया है। सरकार का कहना है कि यह समस्या को सुलझाने के लिए सप्ताह का समय लगेगा।

श्री मोदी की योजना तानाशाही की असफल प्रयोगों के समान है जिसके परिणाम स्वरुप मुद्रास्फीति, मुद्रा पतन और बड़े विरोध प्रदर्शन सामने आए है। श्री मोदी जी ने भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए ये अभियान चलाया है। लेकिन  बेहतर होता यदि सरकार ने अपने पुरानी कर प्रणाली को नवीनतम बनाया होता।

न्यूयॉर्क टाइम्स

नकदी भारत में राजा है। यहा 78 प्रतिशत लेनदेन में नकद का प्रयोग होता है। कई लोगों के पास बैंक खाते या क्रेडिट कार्ड नही है और यहां तक कि जो लोग डेबिट या क्रेडिट कार्ड का उपयोग करते हैं। उन्हे अक्सर नकद का उपयोग करना पड़ता है। क्योंकि कई व्यवसायों के भुगतान के लिए नकदी ही चलती है।

नोट बदलने की इस योजना ने अर्थव्यवस्था को उथल-पुथल में डाल दिया है।  बैंकों में पुराने नोटो को बदलने के लिए मजबूर लोग लम्बी कतारों में खड़े हैं। एक व्यक्ति ने टाइम्स को बताया कि एक बैंक ने उसे नोट बदलने के लिए मना कर दिया क्योकी उसके पास सरकार द्वारा जारी पहचान कार्ड नहीं था जो पुराने नोट जमा करने के लिए आवश्यक है । उसे उम्मीद थी कि नोट बदलवाने के इंतजार में लगे उसके परिवार को कोई चैरिटी खाना खिलाएगी।

ब्लूमबर्ग- मोदी की बड़ी गलती

शुरु में ये पीएम मोदी का मास्टर स्ट्रोक लगा था लेकिन बाद में ये एक बड़ी गलती जैसा लगने लगा।

मोदी के हाल के भाषण नोटबंदी के विषय पर एकदम बेतुके रहे। एक ओर वो नोटबैन की तकलीफ़ पर हँसते हुए दिखे और दूसरी और भारत पर अपने “बलिदान” के लिए रोते दिखे और चेतावनी दी कि कुछ लोग अपनी लूट की रक्षा के लिए उनकी हत्या कर सकते है।

एक सप्ताह में क्या बदल गया है? खैर, एक के लिए, यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार इसकी योजना बनाने में जल्दबाज़ी में सवार थी। अब जब कि भारत की मुद्रा का 86 प्रतिशत वैध नहीं है, केंद्रीय बैंक ने नोट मुद्रित करने के लिए काफी संघर्ष किया है।

वाशिंगटन पोस्ट

एक शोध रिपोर्ट में बैंकिंग की दिग्गज कंपनी एचएसबीसी ने भविष्यवाणी की है कि उपभोक्ता वस्तुओं के आयात गिर जाएेंगे लेकिन सोने की मांग से भरपाई हो सकती है। क्योंकि अस्थिर भारतीय अपने धन को स्टोर करने के तरीके देखते हैं।

नोटबंदी का प्रभाव दो साल के लिए रह सकता है। मंदी के दौर में देश चला रहे हैं और भारतीयों को प्रेरित कर रहे है यूरो या अमरीकी डॉलर के रूप में मुद्राओं में धन रखें।

12/02/2016

इस सर्वे के मुताबिक नोटबंदी के बाद पढ़े-लिखे 56 फीसदी वोटरों ने छोड़ा पीएम मोदी का साथ

जहां एक ओर देश के पीएम नरेन्द्र मोदी और भाजपा नोटबंदी के फैसले पर जनता का साथ होने का दावा कर रहे हैं। वहीं उनके इन दावों की एक अंग्रेजी अखबार के सर्वे ने पोल खोल कर सामने रख दी है। यदि उस अखबार के ऑन लाइन सर्वे की मानें तो 56 फीसदी जनता पीएम मोदी के नोट बंदी निर्णय के खिलाफ और केवल 29 फीसदी ही जनता उनके समर्थन मे खड़ी है। फिलहाल यह सर्वे घट-बढ़ भी सकता है।

बताते चलें नोटबंदी के 21 दिन बाद देश की जनता की राय जानने के लिये अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया ने एक ऑन लाइन सर्वे शुरु किया है। जिसमें देश की जनता से तीन सवालों पर उनकी राय मांगी गई थी।

इन सवालों में

पहला सवाल नोटबंदी का फैसला अच्छा और सही से ढंग से लागू हुआ।

दूसरा, अच्छा फैसला लेकिन सही ढंग से लागू नही हुआ।

तीसरा सवाल, खराब फैसला और बेकार तरीके से लागू हुआ है।

इस अखबार के ऑन लाईन सर्वे की मानें तो देश के पढा-लिखा तबका जो भाजपा का वोट बैंक कहा जाता है उस जनता ने आज तक हुए सर्वे में जो राय दी है। वह राय मोदी एप्स के द्वारा कराये गये सर्वे के उलट है। जनता द्वारा दी गई राय से स्थिति काफी कुछ स्पष्ट हो रही है। इस सर्वे के मुताबिक 56 फीसदी लोगों ने अपनी राय देते हुए नोटबंदी के फैसले को खराब और बेकार तरीके से लागू होना बताया है।

इसके अलावा 15 फीसदी जनता ने अपनी राय देते हुये पीएम मोदी के इस फैसले को अच्छा और सहीं ढंग से लागू न होना बताया।

वहीं केवल 29 फीसदी जनता ने पीएम मोदी के इस फैसले को अच्छा और सही ढंग से लागू होना बताया है।

यदि इस अखबार के ऑनलाइन सर्वे की माने तो पीएम मोदी के साथ केवल 29 फीसदी लोग ही खड़े हुए है।

अब सोइये पांच सौ हज़ार के नोटों के बिस्तर पर

नोट बंदी को तीन हफ्ते बीत चुके हैं। अब चौथा हफ़्ता शुरू हो चुका है। बैंकों की हालत जो सुधरने की बात थी। जो इस हफ्ते और बिगड़ ही रही है। क्या? नहीं बिगड़ रही? एक काम करो गुरु जाई के तनिक बैंक की लाईन में लग के देखो। और जो वहां जाने का बखत नहीं मिल रहा हो तो तनिक एटीएम में ही लग के देख लें। मार हो रहा है। हर रोज। बिल्डिंग के बाहर वाले एटीएम में रोज रात यही बवाल कट रहा है। खैर, जो होना था सो हुआ। अब सुनिए काम की बात।

जिस पैसे के लिए दिन रात एक करके आप भाग दौड़ रहे थे। गलती से भीग जाए तो दो-दिन तक हाथ में प्रेस लिए बैठे रहते थे। उन नोटों का हो क्या रहा है। अभी तक आरबीआई के पास। 8 ट्रिलियन पुराने 500 और 1000 के नोट जमा हो चुके हैं। 8 ट्रिलियन का मतलब जानते हैं। मतलब होता है लगभग 8 लाख करोड़। मुश्किल ये था कि इन नोटों का हो क्या।

अभी तक आरबीआई इन नोटों को जलाने और डंप करने के बारे में सोच रही थी। लेकिन केरल के आरबीआई ब्रांच ने इसका एक और उपाय ढूंढ लिया है। वो अब इन नोटों को एक हार्डबोर्ड बनाने वाली कंपनी को दे रहे हैं। जो इन्हें लकड़ी की भूसी के साथ मिला के जमा देंगे। और ये बोर्ड बन जाएगा।

हां, आपके दिमाग में चल रहा होगा कि कंपनी कहीं नोटों को अपने कारीगरों में बांट दे तब क्या होगा? तो लल्ला आरबीआई वाले इतने बेवक़ूफ़ नहीं  हैं। वो नोटों को पहले रद्दी बना दे रहे हैं। इसके बाद उसे फैक्ट्री वालों को दिया जा रहा है।

कंपनी का नाम है। वेस्टर्न इंडिया प्लाईवुड। बहुत ही पुरानी कंपनी है। इनके एमडी का कहना है कि शुरू में बहुत दिक्कत जा रही थी। क्योंकि नोटों का जो पेपर होता है। उसे पल्प बनाना बहुत मुश्किल था। लेकिन कंपनी के इंजीनियर लोगों ने रास्ता ढूंढ निकाला। होते ही खुराफ़ाती हैं ये इंजीनियर। लिख के रख लो कांग्रेस पार्टी का ट्विटर अकाउंट हैक करने वाला भी इंजीनियर ही होगा।

खैर, आप लाइन में लगिए। भारत मात की जय बोलिए। उधर बंगलुरु में 4 करोड़ से ज्यादा के नोट इनकम टैक्स ने पकड़े हैं। एकदम कड़कड़ीया नोट सब। भारत माता की जय।

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