जनवरी में प्रधानमंत्री मोदी ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कैंपेन के तहत सुकन्या समृद्धि योजना की शुरुआत की थी। पिछले बजट में वित्त मंत्री ने घोषणा की कि इस योजना पर मिलने वाला ब्याज टैक्स फ्री होगा। बेटी की हायर एजुकेशन और शादी के लिए पैसा जमा करने के लिए हालांकि पीपीएफ और आरडी जैसे तरीके भी हैं, लेकिन यह योजना उन पर भारी पड़ती है। आज हम आपको इस सुकन्या समृद्धि योजना के बारे में बता रहे हैं जिससे कि आप आसानी से इस योजना का फायदा उठा सकें और अपनी बिटिया का सुनहरा भविष्य सुनिश्चित कर सकें।
क्या है योजना?पीएम नरेंद्र मोदी ने सुकन्या समृद्धि योजना की शुरूआत 4 दिसंबर, 2014 को थी। यह एक लॉन्ग-टर्म डेट स्कीम है, जिसमें कोई भी शख्स बेटी के जन्म से लेकर उसके 10 साल की हो जाने तक कभी भी अकाउंट खुलवा सकता है। यह अकाउंट बैंक या पोस्ट ऑफिस में खुलवाया जा सकता है। यह अकाउंट बच्ची के 21 साल की होने तक जारी रहेगा।
बेटी की पढ़ाई व शादी की टेंशन होगी दूरखाता खुलवाने के समय 1000 रुपए की जरूरत होगी। जो कैश, चैक, और ड्राफ्ट में जमा हो सकते हैं। यह योजना बालिका के जन्म से लेकर शादी करने तक परिजनों को आर्थिक मजबूती प्रदान करती है। यह योजना घटते लिंगानुपात के बीच कन्या जन्म दर को प्रोत्साहन देने में मदद करेगी। मां-पिता की बेटी की पढ़ाई व शादी के लिए पैसे की टेंशन दूर करने में मदद करेगी।
इन चीजों की होगी जरूरतखाते के लिए लड़की का जन्म प्रमाणपत्र, अभिभावक का पहचान प्रमाण पत्र और निवास प्रमाण-पत्र की आवश्यकता होगी। यह खाता पोस्ट ऑफिस और केंद्र सरकार द्वारा अधिकृत किसी भी बैंक ( भारतीय स्टेट बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक, आंध्रा बैंक, यूसीओ बैंक और इलाहाबाद बैंक) में खोला जा सकेगा।
देनी होगी इतनी रकममाता-पिता दोनों, या फिर दोनों में से एक अथवा दोनों के न होने की स्थिति में कानूनी अभिभावक पैसा जमा कर सकते हैं। कम से कम 1 हजार रुपए से अकाउंट खुलवाया जा सकता है। साल में 1 हजार रुपए और अधिकतम डेढ़ लाख रुपए जमा कराए जा सकते हैं। किसी साल मिनिमम जमा नहीं करा पाते हैं तो अगले साल पिछले साल की ड्यू रकम के अलावा 50 रुपए पेनल्टी देनी होगी। खाता खोलने से 14 साल तक इस स्कीम में पैसा जमा कराना होगा। 14 साल पूरे होने से पहले ही बच्ची 21 साल की हो जाती है तो भी खाता बच्ची के 21 साल की होने पर ही बंद हो जाएगा। अकाउंट में 1 हजार से डेढ़ लाख के बीच कितनी भी रकम साल में जमा करा सकते हैं।
इतने पैसे मिलेंगे वापसजब बच्ची 21 साल की हो जाएगी तो यह योजना मैच्योर होगी। उस वक्त उसे पैसा मिलेगा। हां, बच्ची की हायर एजुकेशन और शादी के लिए समय से पहले भी पैसा निकाला जा सकता है। बच्ची की उम्र 18 साल होने के बाद 50 फीसदी पैसा निकाल सकते हैं। मान लीजिए 2015 में कोई शख्स 1000 रुपए महीने से अकाउंट खोलता है यानी हर साल 12 हजार रुपए अकाउंट में डालता है। उसे 14 साल तक यानी 2028 तक हर साल 12 हजार रुपए डालने होंगे। अगर यह माना जाए कि उसे हर साल 9.1 फीसदी की दर से ब्याज मिलता रहेगा तो जब बच्ची 21 साल की होगी तो उसे मिलेंगे 6,07,128 रुपए। यहां आपको बता दें कि इस शख्स के द्वारा 14 साल में जमा किया गया कुल मूलधन 1,68,000 रुपए ही है। इसके अलावा बाकी की रकम ब्याज की है। जाहिर है, इससे ज्यादा रकम हर साल जमा करने वाले लोगों को इसी अनुपात में मैच्योरिटी का अमाउंट बढ़कर मिलेगा।
टैक्स में मिलेगी छूटइस योजना में किए गए इन्वेस्टमेंट को 80 सी में शामिल किया जाएगा। ऐसा फाइनेंशियल इयर 2015-16 से होगा। 80 सी में छूट की अधिकतम सीमा डेढ़ लाख है। खास बात यह है कि मैच्योरिटी पर मिलने वाली रकम पर भी कोई इनकम टैक्स नहीं देना होगा। फाइनेंशियल इयर 2014-15 के लिए इस पर 9.1 फीसदी की सालाना दर से ब्याज मिलेगा। ब्याज की दर हर साल के लिए अलग से घोषित की जाएगी।
इतनी बच्चियों का खुल सकता है खाताएक बच्ची के नाम पर एक ही खाता खुल सकेगा। और एक परिवार की अधिकतम दो बच्चियों के नाम पर ये खाता खुल सकेगा। लेकिन, यदि एक बार में तीन बच्चियां जन्म लें, या फिर एक बच्ची पहले से हो और फिर जुड़वां बच्चियां हों, इस सूरत में तीनों बच्चियों के नाम एक-एक खाता खुलवाया जा सकेगा। इस योजना को खाता खुलने के 21 साल बाद ही बंद किया जा सकेगा। अगर 21 साल होने से पहले बच्ची की शादी हो जाए तो खाते को पहले ही बंद करवाना पड़ेगा। शादी न होने की सूरत में खाते को 21 साल के बाद भी जारी रखा जा सकेगा।
दूसरी जगह भी शिफ्ट हो सकता है खाताकन्या की मृत्यु हो होने कि स्थिति में, डेथ सर्टिफिकेट जमा करने के बाद ही ये खाता बंद किया जाएगा। इस सूरत में खाते का बैंलेंस के साथ ब्याज का भुगतान परिजनों को किया जाएगा। कन्या एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट होने की सूरत में खाते को दूसरी जगह स्थानांतरित करना भी संभव होगा। जब कन्या की उम्र 18 साल की हो जाएगी। तो जमा राशि का 50 फीसदी राशि शादी या शिक्षा के लिए निकाला जा सकेगा।
7/17/2016
सुकन्या समृद्धि योजना,कन्याओं का बेहतर भविष्य
7/16/2016
हमारी दुनिया: सक्षम ने सालभर में 50 किलो वज़न घटाया, जानिये कैसे हुआ ये चमत्कार
हमारी दुनिया: सक्षम ने सालभर में 50 किलो वज़न घटाया, जानिये कैसे हुआ ये चमत्कार
सक्षम ने सालभर में 50 किलो वज़न घटाया, जानिये कैसे हुआ ये चमत्कार
सक्षम कुमार, अंबाला का स्टूडेंट है और वह दूसरे स्टूडेंट के तरह ही कॉलेज जाता है, दोस्तों के साथ मस्ती करता है। लेकिन एक साल पहले घर जाकर मैंने देखा कि उसने खुद को बिल्कुल बदल दिया है। पहले उसका वज़न 115 किलो था और तब उसका वज़न 57 किलो था। अब उसका मिशन है मसल्स बनाने का। उससे बातचीत के दौरान उसने अपने वज़न घटाने की पूरी कहानी बताई।
तुम्हारा वज़न कैसे इतना बढ़ गया? तुम क्या हमेशा से ही ऐसे थे?
मैं बचपन से ही थोड़ा गोलू-गोलू जैसा था लेकिन दसवीं पास करने के बाद मेरा वज़न बढ़ने लगा। 17 से 19 साल के बीच मैंने इस तरफ उतना ध्यान नहीं दिया। मेरा पूरा ध्यान पढ़ाई पर रहने के कारण ट्यूशन ,स्टडी को लेकर ही व्यस्त रहता है। जंक फूड्स बहुत खाता था और कोई फिज़िकल एक्टिवीटी नहीं था। घर पर रहने के बावजूद घर का खाना न के बराबर खाता था। देर रात पढ़ने की आदत होने के कारण चिप्स, बिस्किट, कोल्ड ड्रिंक ज्यादा लेता था। और फिर वज़न बढ़कर 115 किलो हो गया।
कब तुम्हें महसूस हुआ कि वेट लॉस करना है?
जब मैं कॉलेज जाने लगा तब मुझे अपने लुक का ध्यान आया। सब कोई फिट और स्लिम हैं और मैं थुलथुला मोटा। मैंने सोचा अगर मैं ऐसा ही मोटा रहा तो किसी भी खेल में भाग नहीं ले पाऊंगा। इसलिए 19 साल के उम्र में मैंने वज़न घटाने का निर्णय ले लिया। इस काम में मेरे एक स्कुल के दोस्त ने मुझे प्रेरणा दी। वह भी मोटा था, और किसी हेल्थ प्रॉबल्म के कारण उसको वज़न घटाना पड़ा। उसने मुझे बताया कि क्या करना चाहिए। उसने सबसे अच्छे जिम को ज्वाइन करने की सलाह दी और मैंने वही जिम ज्वाइन किया।
तुम्हारा वर्कआउट रूटीन क्या था?
मेरे पास खुद का कोई पर्सनल ट्रेनर नहीं था। मैंने इंटरनेट पर सर्च किया और वर्कआउट रूटीन और वेट लॉस डायट प्लान बनाया। मैंने वर्कआउट करना शुरू किया, विशेषकर कार्डियो एक्सरसाइज़। मैं ज्यादा वेट ट्रेनिंग नहीं करता था।
मैं 1.5 घंटे जिम में रहता था और 40 मिनट तक ट्रेडमिल, इलेप्टिकल ट्रेनर करता था फिर रन, स्किप, जंप, साइकिल आदि करता था। मेरा एक ही गोल होता था वह है ज्यादा से ज्यादा कैलोरी बर्न करना।
क्या जिम जाने के लिए तुम कॉलेज बंक करते थे?
नहीं मैं शाम को 7.30 बजे जिम जाता था। जिम जाने के पहले ब्राउन ब्रेड पिनट बटर के साथ खाता था और वर्कआउट करने के बाद सोयाबीन या उबला दाल रात खाता था।
तुम कैसा डायट फॉलो करते थे?
मैं दिन की शुरूआत नींबू पानी से करता था, फिर एक मुट्ठी नट्स खाता था। कॉलेज जाने से पहले हाइ फाइबर और डाइजेस्टिव बिस्किट खाता था। लंच और डिनर में चना, दाल सूप, सोयाबीन आदि खाता था। कॉलेज से आने के बाद फल खाता था। शाकाहारी होने के कारण मीट नहीं खाता था। एक साल तक मैंने रोटी और चावल नहीं खाया।
तुमने कोई प्रोटीन सप्लीमेंट लिया था?
नहीं, मेरे पिता ने इसका परमिशन नहीं दिया। उनका पहला शर्त था कि मुझे नैचुरल तरीके से वज़न घटाना है, सप्लीमेंट का सहारा लिये बिना।
तुम अपने क्रेविंग को कैसे कंट्रोल करते थे?
मुझे कुछ हंगर पैंग्स नहीं होता था लेकिन जब मुझे भुख लगती थी तब मैं सलाद, स्टीम्ड ढोकला, ग्रीट टी आदि लेता था। मैंने घर का खाना खाना शुरू किया।
इस काम में क्या तुम्हारे घर के लोग तुम्हारी सहायता कर रहे थे?
हमारे यहाँ बहुत त्योहार मानाया जाता है और त्योहार में मिठाई तो लाज़मी होते हैं। लेकिन मैंने अपने घरवालों को कह दिया था कि मैं अपने डायट प्लान पर ही स्टिक रहूंगा। यहां तक के मेरे रिश्तेदार भी मुझे मिठाई नहीं देते थे।
यहां तक कि मेरे इस सफलता में सबने मेरा पूरा साथ दिया था। जिम के मेम्बरशिप का फी भी उन्होंने ही दिया था। पढ़े- कैसे 115 किलो वज़न वाले रोहण ने अपना वज़न घटाया?
क्या तुमने कॉलेज पार्टी एटैन्ड नहीं किया? वहाँ तुम क्या खाते थे?
कॉलेज पार्टी में मैं कुछ खाता नहीं था। बाहर जाने पर मैं सलाद आदि ही ऑडर करता था। मैंने बाहर जंक फूड्स, कोल्ड ड्रिंक जैसे हाइ कैलोरी फूड्स न खाने का खुद से वादा किया था।
वेट लॉस करने के बाद तुम्हें कैसा महसूस हो रहा है?
पहले के चार महीनों में मैंने चार किलो वज़न घटाया था। वज़न घटते देखकर मुझे खुशी का एहसास हुआ और मैं और मेहनत करने लगा। लेकिन इस ओर भी मुझे इस बात पर ध्यान रखना था कि मेरा वज़न घटाने का एक्शन सही समय पर रोकना है।
तुम्हें कभी भी इस डायट प्लैन को गीभ अप करने का मन नहीं किया था?
कॉलेज में दोस्तों को खाते देख कर मन तो करता था मगर खुद के निर्णय को याद करके कंट्रोल कर लेता था। मैं फिर से वज़न बढ़ाना नहीं चाहता था।
तुम्हारा वज़न घटने पर लोगों की क्या प्रतिक्रिया थी?
पहले तो लोगों को विश्वास ही नहीं हुआ कि मैंने सिर्फ अपने प्रयास से ही इतना वज़न घटाया है। उन्हें लगा कि मैंने कोई सर्जरी किया है लेकिन मैंने उन्हें बताया कि कैसे जिमिंग और डाइटिंग के मदद से वेट लॉस किया।
वेट लॉस करने के बाद तुम्हारे लाइफ में क्या बदलाव आया?
मुझ में पहले से ज्यादा आत्मविश्वास आ गया है। मैं लोगों से पूरे आत्मविश्वास से बात करता हूं कि बिना यह सोचे कि वे क्या सोचेंगे। मैं अब खेल सकता हूं और पहले से ज्यादा एक्टिव हूं।
जो लोग वज़न घटाते हैं उन्हें स्ट्रेच मार्क्स या सैगी स्किन की समस्या होती है। तुम्हें हुआ क्या?
हाँ, वज़न घटने के बाद स्किन में ढीलापन आ गया और पूरे बॉडी में स्ट्रेच मार्क्स आ गए। स्किन को टाइट करने के लिए वेट ट्रेनिंग करने लगा। मैं नारियल का तेल और बाजार से स्ट्रेच मार्क्स के क्रीम का इस्तेमाल करने लगा।
आज तुम्हारा वज़न कितना है?
एक साल तक डायटिंग और वर्कआउट करने के बाद आज मेरा वज़न 57 किलो है।
क्या ये वज़न तुम्हारे हाइट और एज से कम है?
हाँ, मेरा हाइट 5 फिट 7 इंच है और मेरा इस ओर भी ध्यान है। मैं वेट ट्रेनिंग के मदद से जिम में मसल मास को थोड़ा बढ़ा रहा हूं। मेरा फिटनेस प्रोग्राम थोड़ा बदल गया- वेट लॉस से वेट गेन की ओर। मैं अपना वज़न 66 किलो करना चाहता हूं।
तो तुम्हारा नया वर्कआउट रूटीन क्या है?
मैं स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, वार्म अप और कुल डाउन करने के लिए कार्डियो करता हूं। मैं अलग-अलग बॉडी पार्टस पर काम करती हूं, जैसे- चेस्ट, बैक और बाइसेप, लेग्स, ट्राइसेप्स और थ्री सेट्स ऑफ 15 रेप्स करता हूं। सुबह-शाम वाक करने के सिवा क्रिकेट खेलता हूं।
क्या फिर तुमने डायट में भी बदलाव किया?
मैंने रोटी और ब्राउन राइस खाना शुरू किया है। वेट ट्रेन के बाद ज्यादा खाता हूं क्योंकि तब शरीर ज्यादा कैलोरी बर्न करता है। मैं अब भी जंक फूड्स नहीं खाता हूं और आहार विशेषज्ञ से भी सलाह लेता हूं।
क्या तुम वेट लॉस करने के लिए किसी को प्रेरणा देना चाहते हो?
वज़न घटाने के बाद मेरे बहुत दोस्त और रिश्तेदार मुझसे पुछने आये कि मैंने वज़न घटाने के लिए क्या किया? मुझे बस एक ही बात कहना है कि खुद को वेट लॉस करने के लिए प्रेरित करे और अपने निर्णय पर अडिग रहे।
जो लोग वज़ घटाना चाहते हैं उन्हे कुछ टिप्स देना चाहोगे?
खुद पर विश्वास रखो। ग्रीन टी पियो, शुगर और हाई कैलोरी डायट से दूर रहो, नट्स खाओ। सही डायट और एक्सरसाइज़ से वज़न घटाया जा सकता है।
साभार
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7/10/2016
पेड़ काटकर उतारी गई थी इंदिरा गांधी के छोटे बेटे संजय गांधी की लाश!
आज से 36 साल पहले की बात है ये. दिन था 23 जून 1980 का. सुबह का वक्त. प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के घर से एक गाड़ी बाहर निकली. हरे रंग की मेटाडोर. चला रहे थे उनके छोटे बेटे संजय गांधी. अमेठी से सांसद. और एक महीने पहले ही कांग्रेस के महासचिव बने. मगर संजय को अपनी सत्ता और शक्ति के लिए इन पदों की दरकार नहीं थी. सब जानते थे कि पिछले पांच बरस से वही कांग्रेस के सर्वेसर्वा थे.
बहरहाल. संजय घर से निकले. जल्दी में मां को बाय भी नहीं बोला. बेटा वरुण सो रहा था. 3 महीने 10 दिन का बच्चा. पत्नी मेनका उसे संभालने में लगी थीं.
संजय पहुंचे एक किलोमीटर दूर सफदरजंग एयरपोर्ट. यहां उनका इंतजार कर रहे थे दिल्ली फ्लाइंग क्लब के चीफ इन्स्ट्रक्टर सुभाष सक्सेना. और एक मशीन. लाल रंग की शोख चिड़िया. एक नया एयरक्राफ्ट. पिट्स एस 2 ए. हल्का इंजन. कलाबाजी खाने के लिए मुफीद विंग्स.
बस एक चीज मुफीद नहीं थी. संजय का रवैया. सियासत की तरह फ्लाइंग में भी वह दुस्साहस की हद तक लापरवाह और जोखिम लेने वाले थे. अकसर सुरक्षा नियमों को तोड़ते थे. कहने वाले तो ये भी कहते हैं कि जूतों के बजाय कोल्हापुरी चप्पलों में ही प्लेन उड़ाने लग जाते थे. संजय की मां इंदिरा को तमाम ब्यूरोक्रेट्स और नेताओं ने इस बारे में बताया था. मगर बात संजय की थी. जिसकी जिद के आगे पहले भी एक बार बेबस मां ने पूरे देश को रेहन रख दिया था. यहां तो सिर्फ कुछ नियमों भर की बात थी.
मगर नहीं, बात दो जिंदगियों की थी. जो सुबह 7.15 बजे उड़ान भर चुकी थीं. कुछ ही मिनटों में वह अशोका होटल के ऊपर गोल नाच रहे थे. एयरक्राफ्ट अपने नाम के मुताबिक काम दे रहा था. लेकिन 10 मिनट बीतने के बाद संजय इसे खतरनाक निचाई पर लाकर गोते खिलाने लगे. और उसके भी कुछ मिनटों के बाद उनका नियंत्रण खत्म हो गया.
और फिर घर्र घर्र की आवाज करता हुआ डिप्लोमैटिक एनक्लेव में संजय गांधी के घर से कुछ ही मिनटों की एरियल दूरी पर पिट्स क्रैश कर गया.
15 मिनट में मौके पर एंबुलैंस और एयरक्राफ्ट पहुंचे. डालियां काटी गईं. प्लेन के मलबे के बीच से संजय और सुभाष की लाश निकाली गई. ब्रेन हैमरेज के चलते दोनों की मौके पर ही मौत हो गई थी. उन्हें वहीं स्ट्रैचर पर लाल कंबल से ढंक रख दिया गया. कुछ ही मिनटों में वहां पर प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पहुंचीं. अपने सचिव आरके धवन के साथ. कार से उतरते ही इंदिरा दौड़ने लगीं. फिर कुछ संभलीं. मगर बेटे की शकल देखने के बाद फूट फूट कर रोने लगीं.
इंदिरा को संभालने वाला कोई नहीं था. उनकी ताकत छोटा बेटा और राजनीतिक उत्तराधिकारी संजय एक लाश बन चुका था. संजय की बीवी मेनका घर पर थी. बड़ा बेटा राजीव, बहू सोनिया और उनके बच्चे राहुल और प्रियंका इटली में छुट्टियां मना रहे थे.
पूरा देश सकते में था. सब अपने अपने ढंग से संजय को याद कर रहे थे. विरोधी दलों के लिए वह इमरजेंसी का खलनायक था. जिसकी पहली जिद थी जनता कार बनाना. मारूति के नाम से. और इस सपने के लिए मां इंदिरा ने बैकों की तिजोरियां खुलवा दीं. सरकार की हर मुमकिन मदद दी. कार फिर भी नहीं बनी. मगर बेटा तब तक सरकारें बनाने बिगाड़ने में लग गया था. इमरजेंसी के दौरान उसने कभी सेंसरशिप की आड़ में पत्रकारों को धमकाया. तो कभी पूरी की पूरी फिल्म की रील ही जलवा दी. तुर्कमान गेट पर मलिन बस्ती हटाने के लिए गोलियां चलीं. नसबंदी कार्यक्रम के लिए जबरदस्ती की गई.
मगर पब्लिक जबर थी. मसट्ट मारे बैठी रही. और जब बारी आई. तो ऐसा पलटवार किया कि मां इंदिरा रायबरेली से और बेटा संजय अमेठी से बुरी तरह चुनाव हार गए.
इसके बाद शुरू हुआ ट्रायल का दौर. संजय गांधी पर एक के बाद एक मुकदमे लदने लगे. उनका तमाम वक्त पेशी में बीतता. मगर इसे भी संजय ने शक्ति प्रदर्शन का जरिया बना लिया. अदालतों में उनके बाहुबली युवा समर्थकों का हूजूम जुटता. ऐसा लगता गोया कोर्ट रूम नहीं संजय का दरबार सज रहा हो.
एक रोज 11 महीने की सुनवाई के बाद दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट के जज वोहरा ने उन्हें
किस्सा कुर्सी का मामले में एक महीने की सजा सुना दी. और इसके बाद जमानत भी नहीं दी. संजय गांधी, जो एक साल पहले तक देश के हर खड़कते पत्ते को इजाजत देता था, दिल्ली की जेल में था. कुछ रोज बाद उन्हें ऊपरी कोर्ट से जमानत मिली.
समय बदला. लोग बदले. सत्ता बदली और संजय भी बदले.
1980 के चुनाव में उन्होंने मम्मी को वापस पीएम बनाने के लिए सब पत्ते सही फेंके. युवाओं को जमकर टिकट बांटे गए. जनता, सत्तारूढ़ जनता पार्टी के बंटरबांट से तंग थी. कांग्रेस केंद्र में वापस लौटी. और लौटा संजय का रसूख. वह पहला और इकलौता चुनाव भी तभी जीते. अमेठी से ही. जल्द ही उन्होंने मम्मी को एक काम के लिए राजी कर लिया. 9 ऐसे राज्यों में जहां कांग्रेस सत्ता में नहीं थी, विधानसभा भंग करने का फैसला किया गया. कहा गया कि देश ने नया जनादेश दिया है. इन्हें भी नए सिरे से इसे मानना होगा. चुनाव हुए तो 8 राज्यों में कांग्रेस सत्ता में वापस लौटी. इसका श्रेय भी संजय को दिया गया. उन्होंने सभी जगह अपने लोगों को सीएम की कुर्सी पर बैठाया.
संजय के राज्यारोहण की तैयारी शुरू हो चुकी थी. वह अपना राजनीतिक कौशल जाहिर कर चुके थे. ये तय था कि अब कांग्रेस में वही होगा जो संजय चाहेंगे. इसलिए तमाम बूढ़े पुराने नेता भी घुटने मोड़कर दंडवत करने लगे थे. मुख्यमंत्रियों को तो अपनी ऑक्सीजन ही यहीं से मिलती थी.
और तब अचानक संजय चल बसे. सबके समीकऱण हिल गए. मगर जल्द ही समझ आ गया कि संजय के बाद बारी राजीव गांधी की है. जो नहीं समझे, वे संजय की नाराज विधवा मेनका गांधी संग हो लिए. मेनका ने संजय विचार मंच नाम से पार्टी बनाई. अलग चुनाव लड़ा. 1984 में अमेठी से राजीव को चुनौती देने पहुंचीं और खेत रहीं. मगर जनता दल के उदय के साथ उनकी किस्मत भी चमकी. बाद में वह बीजेपी में आ गईं. और बेटा वरुण भी कमल सहारे खिलने की कोशिशों में लगा है.
संजय गांधी की मौत भी उनकी जिंदगी की तरह थी. अचानक. क्रूर. सबको चौंकाने वाली.
और उनका जनाजा उनके राजनीतिक कद की गवाही दे रहा था. हर राज्य का मुख्यमंत्री चिता के 200 मीटर के दायरे में मौजूद था. दिल्ली में मौजूद हर देश का प्रतिनिधि कतार लगा कर खड़ा था. रेडियो पर प्रोटोकॉल तोड़ते हुए शोक धुन बज रही थी. अगले रोज यानी 24 जून को मद्रास में पूर्व राष्ट्रपति वीवी गिरि का भी निधन हुआ था. मगर उस तरफ किसका ध्यान होता.
संजय ने आखिरी बार अपनी तरफ पूरा ध्यान खींचा. और चले गए. मारुति बनाने की चाह रखने वाला मारुति नंदन की तरह हवा में उड़ना चाह रहा था. मगर वो ईश्वर थे. उन्हें गिरने का भय नहीं होता. ये इंसान था. जिसके अंत के लिए एक चूक काफी थी.
देश की हर ATM लाइन में दिखते हैं ये 15 लोग
ATM बनाए गए बैंक की लाइन में खपने वाला वक़्त बचाने को. लेकिन ATM के कॉन्सेप्ट ने हमारे आस-पास के लोगों को भी बदल दिया. ATM जाते वक्त आदमी थोड़ा सतर्क हो जाता है और थोड़ा शक्की. अगली बार आप पैसे निकालने जाएं तो नजर घुमाकर देखिएगा. ये 15 लोग हर एटीएम के बाहर खड़े मिलेंगे.
1. फुरसतिए
वे लोग जो ATM के सामने फुरसत में वक़्त बिताते हैं. उन्हें देख लगता है नानी के घर गर्मी की छुट्टी मेें आए हैं. हमको पता है. एसी के मजे लेने के लिए आते हैं ये जंतु.
2. शक्की मिजाज
कुछ लोग अपने अगल-बगल खड़े लोगों को घूरते हैं. उन्हें लगता है कि बाकी लोग, लोग नहीं गुंडे हैं. लुटेरे हैं. और जैसे ही हम पइसा निकालेंगे ये तमंचा सटाकर लूट लेंगे. ऐसे लोग जब मेरी तरफ देखते हैं तो लगता है कि महीने में एकाध दफा दाढ़ी बना लेना कितना जरूरी होता है.
3. भुलक्कड़ बुद्धू
ख़ुदा-न-ख़ास्ता किसी भले दिन जल्दी में हुए तो आपसे ठीक पहले वाले भाई साहब को अपना पासवर्ड भूल जाता है.
4. हड़बड़ चंद
एक बंदा इतना हड़बड़ाया सा पैसे निकाल रहा होता है, जैसे उसे सत्तर के दशक की फिल्मों वाले किसी डॉक्टर ने कह के भेजा है, ‘अगर आप आधे घंटे में डेढ़ लाख रुपयों का बंदोबस्त कर सकें, तभी हम आपके भाई की जान बचा सकते हैं.’
5. सीखने-सिखाने को आतुर
एक वो जोड़ा होता है जिसमे पहला खुद एक बार पैसे निकालकर दिखाता है और फिर दूसरे को यही दोहराने को कहता है. दो-तीन रीटेक के बाद ट्यूटोरियल ख़त्म होता है. 15 मिनट बाद किसी गहरी खाई में कूद पड़ने का जी करता है जब दोनों कुल जमा तीन सौ रुपये निकाल के मशीन छोड़ते हैं.
6. बहुतै केयरलेस
ऐसे ही किसी ATM पर आपका सामना उस लड़की से होता है जो पैसे निकालने के बाद अक्सर अपना कार्ड मशीन में ही भूल जाती है. यहीं आपको जिज्ञासुओं के दर्शन भी होते हैं ये वो शख्स होता है जो एक बार पैसे निकालने से पहले और दूसरी बार पैसे निकालने के बाद बैलेंस चेक करता है.
7. भयभीत
एक वो सयाने से अंकल होते हैं जो इतना डर-डरकर हर बटन दबाते हैं कि कहीं कोई गलत बटन दबा देने पर उनके पैसे किसी और के अकाउंट में न चले जाएं.
8. बेसब्र
ऐसे लोग भी आते हैं जिन्हें इतना सब्र नहीं होता कि पैसे निकल आने दें. इनका बस चले तो पैसे निकलने की जगह से हाथ डालकर गड्डी बटोर लें.
9. कैमरा फ्रेंडली
एक वो जिन्हें ATM और पैसों से ज्यादा रुचि सामने लगे कैमरे में होती है. ये कैमरे की ओर देखते हुए छोटा-मोटा सा ऑडिशन ही दे डालते हैं. इन्हें लगता है कैमरे की दूसरी तरफ आदित्य चोपड़ा और अनुराग कश्यप ही बैठे हैं.
10. बेरहम
एक वो जो ATM से ट्रांजैक्शन की रसीद निकलते ही उसे बिन में ऐसे मसलकर फेंकते हैं मानो एक्स-गर्लफ्रेंड का वैलेंटाइंस डे पर दिया ‘लव यू फॉरेवर’ वाला कार्ड हो.
11. बटोरू चंद
दूसरे वो जो ATM से ट्रांजैक्शन की रसीद निकलते ही उसे पर्स में ऐसे संभालकर रखते हैं मानो अगली बार वो पर्ची मंगतराम पंसेरी की दुकान पर दिखाने के बदले आधा पाव आमचूर में दस रुपए छूट मिलेगी.
12. प्रोग्रामिंग एक्सपर्ट
कुछ लोग अपने व्यवहार से एटीएम ऑपरेट करने में इतनी दक्षता दिखाते हैं,कि उन्हें देखकर लगता है एटीएम से पैसे नहीं निकाल रहे बल्कि जावा में प्रोग्रामिंग कर रहे हैं.
13. पलटू
एक वो जो इस तरह से बार-बार पलटकर पीछे देखता है मानो सकल ब्रह्मांड का ध्यान इस वक़्त सिर्फ उस पर ही लगा हो. इन्हें देख शक होता है कहीं ये CIA के एजेंट तो नहीं जो ATM से पैसों की बजाय हथगोले निकालने आए हैं.
14. कैंसल प्रेमी
वहीं एक शख्स ऐसा होता है,जिसका सारा ध्यान कैंसल दबाने में लगा होता है. आपको जल्दी हो और अगला भीतर कैंसल पर कैंसल दबाए जा रहा हो. तो ऐसा लगता है मानो किसी क़त्ल के बाद अगला फिंगरप्रिंट मिटा रहा है.
15 . पूछताछ को आतुर
इन सबसे जूझकर, बचकर और छूटकर आप पैसे निकालते हैं और जैसे ही बाहर निकलते हैं आपका सामना उस लड़के से होता है जो हर बाहर आने वाले से एक ही सवाल कर रहा होता है. “चल रहा है न?”