10/24/2016

स्वस्थ रहने के लिए रोज़ कम से कम आठ गिलास पानी पीना ज़रूरी नहीं है

माना जाता है कि 1945 के दौरान अमेरिका में जारी एक आहार संबंधी अनुशंसा की वजह से यह मिथक दुनियाभर में फैला है.

युवा शरीर में उसके कुल वजन का लगभग 60 फीसदी पानी होता है. यह शरीर के लिए एक अहम पौष्टिक तत्व भी है और बाकी तमाम चीजों से ज्यादा जरूरी भी. यह हमारे शरीर का तापमान सामान्य रखने में मदद करता है. शरीर के विभिन्न हिस्सों में पौष्टिक तत्वों की आपूर्ति करने और अपशिष्ट (बेकार चीजें) को बाहर निकालने में मददगार होता है. खून को शरीर के हर हिस्से में पहुंचाता है और सभी तरह की रस प्रक्रियाओं-प्रतिक्रियाओं (मेटाबॉलिज्म रिएक्शंस) को संभव बनाता है. शरीर के जोड़ों में लुब्रीकेन्ट (चिकनाई) की तरह रहता है, ताकि उनमें घर्षण न हो.

इस तमाम संदर्भ के साथ यह जानना बड़ा दिलचस्प है कि शरीर के लिए रोज आठ गिलास पानी की जरूरत संबंधी भ्रान्ति 1945 से चली आ रही है. उस वक्त अमेरिका में सुझाई गई आहार संबंधी अनुशंसाओं में (डाइटरी अलाउंस) में एक यह भी थी. हालांकि इन अनुशंसाओं में आगे यह भी कहा गया था कि युवा व्यक्ति को दिनभर में कम से कम ढाई लीटर पानी की जरूरत होती है और यह जरूरत खाने-पीने की विभिन्न चीजों से ही पूरी हो सकती है. ऐसे में अगर इस अनुशंसा के आखिरी हिस्से पर गौर न करें तो फिर इसकी व्याख्या इस स्पष्ट निर्देश के रूप में की जा सकती है कि रोज आठ गिलास पानी पीना जरूरी है.

जबकि वैज्ञानिक साहित्य में व्यापक खोजबीन के बाद भी ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिलता, जिससे ‘आठ गिलास पानी रोज’ वाला यह मिथक सही साबित हो सके. और इस ‘निर्देशात्मक सलाह’ के पक्ष में कोई सबूत न मिलने के पीछे एक बड़ी वजह यह है कि व्यक्ति अपनी जरूरतभर का पानी इसका एक गिलास उठाए बिना भी हासिल कर सकता है. सॉफ्ट ड्रिंक, फलों के जूस, दही, चाय-कॉफी, दूध-दही, फल, सूप, उबली चीजों आदि सभी खाद्य पदार्थों में पर्याप्त मात्रा में पानी होता है. यह भी हमारे शरीर में पानी की जरूरत को पूरा करते ही हैं.

यहां यह भी बता देना जरूरी हो जाता है कि ऑस्ट्रेलिया में की गई खुराक संबंधी अनुशंसाओं में भी ‘राेज आठ गिलास पानी’ पीने संबंधी सिफारिश को एक तरह से खारिज कर दिया गया है. यहां की आधिकारिक अनुशंसाओं में कहा गया है, ‘पानी पीने का कोई एक एेसा मानक स्तर पर नहीं है, जो यह सुनिश्चित करता हो कि स्वस्थ लोगों को न्यूनतम या अधिकतम इतना पानी पीना चाहिए तभी उनके शरीर पानी का सही संतुलन बरकरार रह सकता है.’

इसी तरह का ही एक मिथक और है कि ‘काॅफी पीने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है.’ इस मिथक को भी तोड़े जाने की जरूरत है. यह सच है कि कॉफी, चाय और शीतल पेय पदार्थ पीने से शरीर में मूत्रवर्धक प्रणाली भी सक्रिय हो जाती है. इससे मूत्र के माध्यम से कुछ पानी शरीर से बाहर निकल सकता है. लेकिन इन पेय पदार्थों से जितनी मात्रा में पानी शरीर को मिलता है, उसकी तुलना में बाहर निकलने वाला पानी बहुत ही कम होता है. हां, जिन पेय पदार्थों में अल्कोहल की मात्रा अधिक होती है (जैसे शराब), उनसे जरूर शरीर में पानी की कमी हो जाती है.

लिहाजा, अब सवाल हो सकता है कि अगर ‘रोज आठ गिलास’ नहीं तो फिर किसको कितने पानी की जरूरत होती है? आप खुद यह कैसे पता कर सकते हैं, आपको रोज कितना पानी पीने की जरूरत है?

इसका जवाब बड़ा आसान है. हर घंटे में आप यह पता कर सकते हैं कि आपके शरीर में पानी का संतुलन ठीक है या कुछ कमी हो गई है. इसका तरीका ये है कि अगर मूत्र हल्का रंगीन या एकदम साफ है तो आप पर्याप्त मात्रा में पानी पी रहे हैं. या यूं कह लीजिए कि आपके शरीर में पानी का संतुलन ठीक है. लेकिन अगर मूत्र गहरा पीलापन-मटमैलापन लिए है, तो मतलब ये कि शरीर में पानी की कमी हो रही है और आपको तुरंत पानी पी लेना चाहिए.

(ऑस्ट्रेलिया की डैकिन यूनिवर्सिटी में पोषण आहार विभाग के प्रोफेसर टिम क्रो का यह आलेख ‘द कनवर्जेशन’ पर प्रकाशित हुआ था)

10/23/2016

हम सपने में भाग क्यों नहीं पाते और कभी मरते क्यों नहीं हैं?

अक्सर ऐसा होता है कि जो काम हम रोजमर्रा की जिंदगी में बड़ी आसानी से कर लेते हैं उन्हें सपनों में पूरा करते-करते हमें पसीने आ जाते हैं. यह बात हममें से हर किसी ने महसूस की होगी कि अगर सपने देखते हुए हमें भागने की नौबत आ जाए तो हम उतनी तेजी से नहीं भाग पाते जितनी तेज दौड़ने की हमें जरूरत होती है. ऐसा ही सपने में मुक्के मारने या चीखने की कोशिश करते वक्त भी होता है. यहां तक कि सपने में तो हमें मरना भी नसीब नहीं होता.

सपने मनोविज्ञान के लिए अभी भी पहेली बने हुए हैं. उनके स्पष्ट परिभाषित न हो सकने के कारण उनमें देखी गई घटनाओं की हमें तरह-तरह की व्याख्याएं सुनने-पढ़ने को मिलती हैं. सपनों पर किये गये कई शोध बताते हैं कि हमारी बाहरी परिस्थितियों हमारे द्वारा देखे गये सपनों को प्रभावित करती हैं. जैसे अगर आप लगातार किसी काम के लिए मेहनत कर रहे हैं और उसमें सफल नहीं हो पा रहे हैं तो आपको न दौड़ पाने या न बोल पाने जैसे सपने आते हैं. इस तरह के सपने किसी व्यक्ति के चेतन और अचेतन मन में लगातार चल रहे संघर्ष को दिखाते हैं. अचेतन मन सपनों के जरिये लगातार यह इशारा देने की कोशिश कर रहा होता है कि कुछ ऐसा है जो उसे सफल होने से रोक रहा है.

सपनों के विश्लेषक लगातार या तेजी से न दौड़ पाने की स्थिति को आत्मविश्वास की कमी से भी जोड़कर देखते हैं. उसी तरह से अगर आप सपने में बोल नहीं पा रहे हैं तो इसका अर्थ यह समझा जाता है कि आप दूसरों तक अपनी सोच नहीं पहुंचा पा रहे हैं. आपको ऐसा लगता है कि आपके विचारों से कोई सहमत नहीं होगा.

मनोविज्ञान का दूसरा विचार यह कहता है कि किसी को मुक्का मारना या भागना शरीर के कई अंगों के समन्वय से होने वाली गतिविधि है. इस तरह के कामों में शरीर के अलग-अलग अंग अलग-अलग भूमिका निभा रहे होते हैं. वहीं जब हम सपने देख रहे होते हैं तो शरीर के बाकी अंग शिथिल होते हैं केवल दिमाग ही सक्रिय होता है और शरीर को निर्देश भेज रहा होता है. लेकिन दिमाग के पास इसकी जो प्रतिक्रिया वापस पहुंचती है वह बताती है कि शरीर उसके निर्देश का पालन करने में असमर्थ है. ऐसा ही कुछ हमें सपने में दिखाई देता है.

कुछ वैज्ञानिक प्रयोग बताते हैं कि सपने असलियत के मुकाबले काफी धीमी गति से घटते हैं. स्विट्ज़रलैंड की बर्न यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डेनियल एर्लाकर ने नींद में सपने देखते हुए दिमाग की क्रियाओं का विश्लेषण किया और पाया कि सपने देखते हुए इंसान किसी भी काम को करने में सामान्य से डेढ़ गुना ज्यादा समय लेता है. यानी कि अगर आप सपने में भागने की कोशिश करते हुए अपने पैरों को आगे बढ़ा रहे हैं तो वे बहुत धीमी गति से आगे बढ़ेंगे. उस समय आपको महसूस होगा कि कोई आपको आगे बढ़ने से रोक रहा है.

इसी तरह से नींद में आपको बार-बार लगता है कि आप मरने वाले हैं लेकिन ऐसा कभी होता नहीं है. इसका कारण दौड़ने-भागने के कारणों से बिलकुल अलग है. सपने में हम जो भी देखते हैं, सुनते हैं या महसूस करते हैं वह हमारे पिछले अनुभवों पर आधारित ही होता है. लेकिन हमारे दिमाग को यह मालूम ही नहीं होता कि मरने का अनुभव कैसा होता है. इसलिए आप सपने में खुद को कभी मरता हुआ नहीं देख पाते.

इस अकल्पनीय फिगर वाली कैरेक्टर ने महिलाओं के लिए क्या किया है?

शुक्रवार को यूनाइटेड नेशंस ने कॉमिक्स कैरेक्टर ‘वंडर वुमन’ को औरतों के सशक्तिकरण का एंबेसडर बनाया है. ये मौका था यूनाइटेड नेशंस के लगभग साल भर के सोशल मीडिया कैंपेन शुरू होने का. जिसमें औरतों के सशक्तिकरण और जेंडर इक्वैलिटी को प्रमोट किया जायेगा.

शुक्रवार को वंडर वुमन का 75वां बर्थडे था. 1941 में पहली बार इनका कॉमिक्स आया था. इनको ‘प्रिंसेस ऑफ थर्मिस्काइरा’ भी कहा जाता है.

पर ये कोई इमोशनल करने वाला मौका नहीं था. यूनाइटेड नेशंस के ही 1000 लोगों ने तुरंत ऑनलाइन पेटीशन दिया कि वंडर वुमन इस काम के लिये उपयुक्त चॉइस नहीं है. कहा गया कि,

‘बड़े-बड़े स्तनों वाली एक व्हाइट लड़की, जिसने छोटे कपड़े पहने हुये हैं. जिसके शरीर के अंग इस कदर हैं जो रियल लाइफ में हो नहीं सकते. थाई दिखाते हुये बूट पहने हुये ये लड़की पिन-अप गर्ल है. जो मर्दों के मन की उपज है.’

जिन लोगों ने साइन किया, उन्होंने कहा कि यूएन से ये उम्मीद नहीं थी. ये लोग एक रियल लाइफ लड़की नहीं खोज पाये. और ये बात करते हैं वुमन इम्पावरमेंट और जेंडर इक्वलिटी की.

वंडर वुमन पर फिल्म भी आ रही है 2017 में. इसमें इजराइली एक्ट्रेस गेल गडोट वंडर वुमन बनी हैं. 1941 में इस कैरेक्टर को एक साइकॉलॉजिस्ट विलियम मार्सटन ने बनाया था. इस कैरेक्टर ने को फेमिनिस्ट आइकन भी माना जाता है.

यूनाइटेड नेशंस का जवाब था,

‘हमने इसका फेमिनिस्ट बैकग्राउंड देखा. पहली औरत जो सुपरहीरो बनी. जिस दुनिया में सिर्फ मर्द सुपरहीरो हुआ करते थे. इस लड़की ने हमेशा ही फेयरनेस, जस्टिस और पीस के लिये लड़ाई की है.’

लेकिन यूनाइटेड नेशंस का जवाब बड़ा ही बचकाना है. क्योंकि अभी पुर्तगाल के एंटोनियो गटरेस को यूएन का अगला सेक्रेटरी जनरल चुना गया है. जबकि पूरी दुनिया में ये मांग चल रही थी कि एक औरत को चुना जाये. ये भी पता चला है कि यूएन के टॉप 10 पोस्ट में से 9 मर्दों को ही जाते हैं. ऐसा नहीं था कि टॉप पोस्ट के लिये औरतों की कमी थी. इसमें न्यूजीलैंड की पूर्व प्रधानमंत्री, यूनेस्को की डायरेक्टर जनरल और यूरोपियन यूनियन की एक अधिकारी भी हैं. इनके अलावा खोजा जाए तो दुनिया में इस पोस्ट के लिये औरतों की कमी नहीं है. कितनी औरतें तो ऐसी हैं जो शांति के लिये नोबल जीत चुकी हैं. दूसरे देशों में जाकर लोगों के लिये काम कर रही हैं. बाकी पोस्टों के लिये भी तो औरतें चुनी जा सकती हैं.

सबसे मजेदार बात है कि वंडर वुमन 1941 में जन्मी थी और यूएन 1945 में. और वंडर वुमन को लड़कियों के इम्पॉवरमेंट के लिये चुना गया है. कॉमिक्स में वंडर वुमन एक बार अमेरिकी प्रेसिडेंट के लिये लड़ी भी थी और हार गई थी. वहां भी नहीं जिता पाये.

मतलब वुमन इम्पॉवरमेंट सिर्फ कल्पना में हो रहा है. असल जिंदगी में पावर शेयर नहीं किया जायेगा. जब भी औरत को दिखाना हो तो उसी तरह दिखाइये जैसा लोग कल्पना में औरतों को देखते हैं. एकदम अकल्पनीय फिगर. जो मर्दों के तन-मन को सुख पहुंचाये. जो औरत लड़-झगड़ के अपना मुकाम बना रही है, वो एम्बेसडर बनने लायक भी नहीं है.

सेक्रेटरी जनरल और प्रेसिडेंट तो दूर की बात है. हिलेरी क्लिंटन जब से चुनाव लड़ रही हैं तब से डॉनल्ड ट्रंप उन के चरित्र पर ही सवाल खड़े कर रहे हैं. जबकि उनके खुद के बारे में तरह-तरह की चीजें सामने आ रही हैं. यूएन का ये फैसला अंतत: मर्दवादी सोच का ही नतीजा है, जिसमें एम्पावर्ड औरत वह है जिसके स्तन बड़े हैं और जिसे देखकर कामुक हुआ जा सकता है. अगर वो प्रेसिडेंट का चुनाव कॉमिक्स में भी लड़े तो जीतने नहीं देना है.

10/10/2016

रिलायंस जियो बंद होने वाला है

बना हुआ है. जियो के सिम से बतिया रही जनता को देखकर सीधे एलजी के सेट पर रिलायंस CDMA वाला जमाना याद आता है. लै बातें… दै बातें… भर-भरकर बातें. और अब तो स्मार्टफोन का जमाना है. लौंडों को नेट का सही यूज करना भी आता है. ऐसे लौंडों की वजह से ही तो टॉरेंट वालों का करियर चल रहा है. लेकिन गुरू… अब मौज के दिन खत्म हो गए हैं. रिलायंस जियो बंद हो जाएगा.
क्या हुआ. छाती दरक गई? कलेजा हुलसने लगा. आंखें चौंधिया गईं. पर क्या बताएं मौसी… काम ही मुकेश अंबानी ने कुछ ऐसा किया है. यहां जनता देशप्रेम वाली गोटी खेल रही है और अंबानी चीन से सिम पर सिम मंगाए जा रहे हैं. खुलेआम, दिनदहाड़े, सरेराह… देशद्रोह!
पहिले आंकड़े समझो. जनवरी, 2016 के पहले ही हफ्ते में जियो के साढ़े चार लाख सिम चीन से मंगाए गए थे. मंगाए क्या गए थे, बनते ही वहीं हैं. एक तरफ मोदी जी हलकान हुए जा रहे हैं मेक इन इंडिया के प्रमोशन में, दूसरी तरफ अंबानी चीन से ऐसे-ऐसे बिन्निस कर रहे हैं. 12 जनवरी को चीन से एक और कन्साइन्मेंट आया था. उसमें फिर जियो के पांच लाख सिम आए थे. 16 जनवरी को फिर सवा चार लाख सिम आए. ये सिलसिला पूरे साल चलता रहा. अभी 28 सितंबर को ही ढाई लाख सिम आए हैं चीन से. ये देखो.
देखो, कब कित्ते सिम आए हैं चीन से (डेटा सोर्स: zauba)
अब बताओ. इस समय हर जगह देशप्रेम की लहर है. चीनी सामान का विरोध हो रहा है. कहा जा रहा है कि हम चीन का सामान खरीदकर उस पर पैसा लुटाते हैं और वो वही पैसा नवाज शरीफ को दे देता है हमारे जवानों को मारने के लिए. तो अच्छा है कि चीन का सामान खरीदा ही न जाए. बिजनेस अपनी जगह है, लेकिन देशप्रेम से बढ़कर थोड़ी न है.
अब जब ये पक्का पता चल गया है कि जियो के सिम चीन से आ रहे हैं तो पूरे भारत के देशभक्त तो इन्हें यूज करेंगे नहीं. जिन्होंने मुफत का माल समझकर ले लिया था, वो भी इसके 56 टुकड़े करके आग लगा देंगे. वैसे भी हमारे यहां देशभक्तों की कमी तो है नहीं. हर चौराहे पर चाट-पकौड़ी खाते रहते हैं देशभक्त. ऐसे में गद्दार बचे ही कितने हैं. गद्दार उतने ही बचे हैं, जितने परशुराम के सर्जिकल स्ट्राइक के बाद धरती पर ठाकुर बचे थे. ससुरा इतने सर्जिकल स्ट्राइक के बावजूद न जाने कहां से पैदा हो जाते थे.
तो ये जो छिटपुटिए गद्दार बचे हैं, इनके सहारे तो मुकेश अंबानी जियो का कारोबार चला नहीं पाएंगे. हर खेप में लाखों सिम आ रहे हैं, चीन वाली बात पता चलने के बाद तो यूज करने वाले सौ-पचास या कुछ हजार बचेंगे, तो कहां से काम चलेगा. ऐसे में कंपनी तो बंद करनी ही पड़ेगी न. अच्छा वैसे जिनके हलक से अब तक ये बात नहीं उतर रही है कि सिम चीन से आ रहे हैं वो एक फोटो और देख लें.
और अंदर की बात बताएं दोस्त. जब से मुकेश अंबानी ने लोगों को चीनी सामान का विरोध करते देखा है न, तब से उनकी हालत बड़ी दयनीय हो गई है. सुना है आज-कल दिनभर कांपते रहिते हैं. दो-चार आदमी आस-पास बिठा रखे हैं जो जियो के बढ़ते ग्राहकों की गिनती करते रहते हैं ताकि उनके होशो-हवास में कुछ सुधार हो. अब चीनी सामान के विरोध की फोटो हैं ही ऐसी कि किसी की भी जान हलक में अटक जाए. अपने यहां तो सीधे प्रधानमंत्री से बैन लगवाया जाता है. ये अलग बात है कि PMO ने सफाई देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री की तरफ से ऐसा कुछ नहीं कहा गया है.
अच्छा हां, एक और बात तो बताना भूल ही गए. एक हैक्टिविस्ट ग्रुप ने खुलासा किया था कि जियो के ग्राहकों की जानकारी अमेरिका और सिंगापुर में भेजी जा रही है. देखो होता क्या है कि आप इंटरनेट पर जो भी ज्यादा देखते-सुनते हैं, उसके आधार पर ये तय किया जाता है कि आपको कौन से विज्ञापन दिखाए जाएंगे. तो आरोप यही है कि जियो अपने ग्राहकों की जानकारी बेच रही है ताकि कंपनियां अपने हिसाब से विज्ञापन दिखा सकें.
एक चीज और नहीं समझ आ रही है. जियो बेचने के विज्ञापन को डिजिटल इंडिया से जोड़ा गया था, लेकिन इसमें मेड इन इंडिया जैसा तो कुछ है ही नहीं. सिम बन रहे हैं चीन में और नेटवर्क वाले उपकरण आ रहे हैं फ्रांस और जर्मनी से. और इंडियावाले यूज कर रहे हैं फ्री में. ये मुफत वाली आदत जाएगी थोड़ी न हम लोगों की. वैसे अब क्या दिक्कत है. अब तो देशभक्त सारा काम संभाल ही लेंगे. कसम पैदा करने वाले की, देशद्रोही जियो तो बंद करवाकर ही रहेंगे. जय भद्रकाली.

10/04/2016

जानिये कैसे रिश्तों में दरार पैदा करता है आपका लाडला व्हाट्सअप

     सदियों से प्रेम पत्रों का चलन रहा और फिर आया डिजिटल ज़माना। कलम की-पैड में बदल गए और कागज़ डिजिटर स्क्रीन में। एक सेंड बटन दबाते ही, कई दिनों में पहुंचने वाला प्रेम संदेश सेकंडों में आपके प्रेमी तक। व्हाट्सएप ने प्रेमियों की दुनिया में जैसे एक क्रांति ही लाकर रख दी। रास्ता हो या फिर दफ्तर, जैसे ही प्रेमी की याद आए बस फोन उठाया, व्हाट्सएप मैसेज टाइप किया और सीधा सेंड। व्हाट्सएप मेसेजिंग, व्हाट्सएप कॉलिंग व इसके बाकी के कई फीचर हैं। लोग व्हाट्सएप के दीवाने हैं, या कहिये इसके पूरी तरह से आदि हो चुके हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस व्हाट्सएप का आपके रिश्ते में गंभीर प्रभाव पड़ता है? ये आपके रिश्ते पर काफी भारी पड़ सकता है, चलिये बताते हैं कैसे -

●लगातार संपर्क में रहने की बाध्यता

व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का एक बड़ा नुकसान ये है कि यह आपको अपने प्रेमी व बाकी महत्वपूर्ण लोगों के साथ लगातार संपर्क में रखने के लिए बाध्य करते हैं। अगर वह हर 15 मिनट में कोई मैसेज या पोक नहीं कर कर रहा है, तो महसूस होना शुरू हो जाता है कि आप उसे ठीक से बात नहीं कर रहे हैं, या अवोइड कर रहे हैं।

●ब्लू टिक मार्क है समस्या

व्हाट्सएप का नया अपडेट ब्लू टिक मार्क ये दर्शाता है कि दूसरे व्यक्ति ने आपका मेसेज पढ़ लिया है। ये एक तरह से बड़ी समस्या का कारम है, यदि आप किसी काम में व्यस्थ हैं, लेकिन आपने अपने साथी का मेसेज पढ़ तो लिया है, लेकिन जल्दबाज़ी में जवाब देने का समय नहीं है, तो ऐसे में आपका पार्टनर भड़क जाता है। दुनिया में ऐसे भी लोग हैं, जिन्होंने ब्लू टिक मार्क की वजह से हुए विवाद के चलते तलाक भी लिये हैं। 

●लास्ट सीन है खतरनाक

अगर बॉयफ्रेंड का लास्ट सीन 10:15 दिखा रहा है और एक मिनट भपर हो जाने के बाद भी उसका रिप्लाई नहीं आया तो ये लड़के के लिये एक बड़ी समस्या है।  ये चीज़ एक दूसरे के मन में शक का बीज बो सकती है और ब्रेकअप की नौबत तक आ सकती है। और अगर आप लास्ट सीन छिपाते हैं तो भी आप फंसते हैं। ये 'ये ना उगल पाएं, ना निगल पाएं' वाली स्थिति होती है।

●एक दूसरे की स्वतंत्रता

दिन भर मैसेज करना किसी रिलेशनशिप की शुरुआत में तो बेहद मज़ेदार लगता है, लेकिन रेलेशन थोड़ा पुराना हो जाने के बाद ये एक बड़ा सिर दर्द बन जाता है। आपको हर मैसेज का रिप्लाई करना होता है, वरना ये समझाना होता है कि आप क्या मैसेज का रिप्लाई नहीं कर पाए/पाईं। इस तरह से आपकी निजि स्वतंत्रता की तो वाट ही लग जाती है, और रिलेशनशिप व्हाट्सएप की मेहरबानी से एक बोढ बन जाता है।

●भाषा और स्टेटस का पंगा

हम कई बार कहना कुछ चाहते हैं, लेकिन लिखने पर पढ़ने वाले को उसका मतलब कुछ और समझ आता है। इस तरह काफी मिस अंडरस्टेंडिंग पैदा होती है। वहीं आपके द्वारा डाला गया व्हाट्सएप स्टेटस भी कई बार गलत संदेश देता है और आपका साथी आपसे नाराज़ हो जाता है।




10/03/2016

व्रत वाला साबूदाना

ये तो पता ही होगा कि डॉमिनोज वाले फुल वेज पिज्जा निकाले हैं. साबूदाने वाला. पिज्जा तो आज का है, लेकिन साबूदाना काफी पहले से है. व्रत के लिए सबसे खास आइटम है. धकापेल उड़ाया जाता है. हलवा, खिचड़ी और खीर बनाकर खाई जाती है. इसलिए अब पिज्जा का छोड़ो. उसका रिव्यू तो खाने के बाद किया जाएगा. तुम साबूदाने की पोल-पट्टी सुन लो. फिर साबूदाने की खीर और हलवा और ये लेटेस्ट पिज्जा खाते रहिना. कोई हाथ तो पकड़ेगा नहीं.
एक पेड़ होता है. सागो. इसी की जड़ का गूदा निकालकर साबूदाना बनाया जाता है. केरल वाले इसको कप्पा कहते हैं. मजे की बात ये है कि ये खाया तो सबसे ज्यादा उत्तर भारत में जाता है. और पैदा होता है दक्षिण भारत में. वैसे तो स्मार्ट टेक्नॉलजी के वक्त ये दूरी कुछ नहीं है. चाहे तो कोई भी एक क्लिक में पूरी जानकारी ले ले. लेकिन कोई रिस्क नहीं लेता. कि एक तो व्रत में गिनी-चुनी चीजें खाने को मिलती हैं, उसमें से भी एक आइटम कट जाए, तो क्या बचेगा.
है तो शाकाहारी. लेकिन बनते-बनते इसकी दुर्गति हो जाती है. कचूमर निकल जाता है. कायाकल्प हो जाता है. जड़ें काटकर, ट्रकों में लादकर तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक की फैक्ट्रियों में पहुंचता है. वहां उसके साथ कांड शुरू होता है. छीलकर मेन चीज निकाल ली जाती है. वो फैक्ट्रियों में कई चक्कर घिसकर, कटकर महीन टुकड़ों में बंट जाता है. फिर उसे पानी में डालकर बड़े-बड़े खुले टैंकों में रखा जाता है. बस इसी जगह सारी छीछालेदर हो जाती है. यहां पड़ा-पड़ा वो फूलता है. सड़ता है. इसमें तमाम कीड़े पड़ जाते हैं.
वही कीड़े साबूदाने को लज़ीज़ बनाते हैं भाईसाब. बहुत दिनों तक उन खुली टंकियों में रखने के बाद उसे दानेदार बनाते हैं. पॉलिश करते हैं और बोरों में भरकर पैकिंग के लिए भेज देते हैं. जो मन्नू किराना स्टोर पर पहुंचता है. वहां से आपके घर, किचन से होकर प्लेट में.
वैसे खास बात ये है कि ये मांसाहारी नहीं होता. अमा कीड़ों के न हड्डियां होती हैं न मांस, न खून. तो वो चाहे जित्ता पड़ा हो, मांसाहारी नहिये होगा. लेकिन अगर डिस्कवरी चैनल वाले बेर ग्रिल्स नहीं हो. और कीड़े में प्रोटीन नजर नहीं आता, घिन आती है खाने में, तो ये आपके लिए नहीं है. अगर व्रत रखते हुए अंतर्यामी दुर्गे को साबूदाना खाकर चकमा दे रहे हो तो वो तुमको त्रिशूल भोंक देंगी.

9/23/2016

2 दिन तक व्हाट्सएप पर चाहे जो कर लो, उसके बाद के लिए ये पढ़ लो

25 सितंबर तक का आपका सारा डाटा सेफ है और ये फेसबुक के साथ शेयर नहीं होगा. यही फैसला है. हाई कोर्ट ने कह दिया है. अगर यूजर 25 सितंबर से पहले अपना अकाउंट हटा देते हैं तो व्हाट्सएप्प को यूजर के डाटा को पूरी तरह से सर्वर से डिलीट करना होगा. हाई कोर्ट ने इसके अलावा केंद्र सरकार को कहा है. सुनो तय करो कि इंटरनेट मैसेजिंग ऐप्स को कैसे कानूनी नियम कायदे से रेगुलेट किया जाए.
अब क्योंकि ज्यादातर को इस फैसले का मतलब तो नहीं ही समझ आया होगा. इसलिए ऐसा समझो कि हाई कोर्ट के इस ऑर्डर के बाद व्हाट्सएप्प के कष्ट-मरों के लिए बड़ा खतरा होगा. खतरा ये कि व्हाट्सएप्प की नई प्राइवेसी पालिसी जो 25 सितंबर से लागू हो रही है. उसके बाद यूजर का डाटा और पर्सनल इंफो कभी भी फेसबुक के साथ शेयर हो सकता है.
व्हाट्सएप अपने यूजर का नंबर फेसबुक से शेयर करेगा. जिससे व्हाट्सएप चलाने वालों को फेसबुक से और चुने हुए ऐड मिलेंगे. ये एड फेसबुक पर होंगे. कंपनी कहती है कि फेसबुक को दिया गया नंबर सेफ रहेगा. व्हाट्सएप कहता है कि इस शेयरिंग से फेसबुक मैपिंग होवेगी. बेहतर फ्रेंड सजेशन और ज्यादा सटीक ऐड यूजर्स को मिलेंगे.
ये याचिका कर्मण्य सिंह सरीन और श्रेया सेठी ने दायर की थी. वो कहते हैं ये नए चोंचले 7 जुलाई 2012 की प्राइवेट पॉलिसी के खिलाफ है. 25 अगस्त 2016 में इस पॉलिसी में संशोधन किया गया. व्हाट्सएप डाटा शेयर कर रहा है , जो यूजर से धोखे जैसा है. कोर्ट से कहा गया था इस के खिलाफ कुछ करिए.