11/09/2016

नोट बैन पर 25 सवाल-जवाब, जो RBI चाहता है कि आप जान लें

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नोट बैन पर 25 सवाल-जवाब, जो RBI चाहता है कि आप जान लें

हजार और पांच सौ के नोट बैन होने के बाद से जनता बौराई हुई है. ये अपने यहां की पुरानी खाज है. किसी चीज के बंद होने पर लोग इतना पैनिक हो जाते हैं कि लाख समझाने के बावजूद हुसड़ियाए रहिते हैं. हर जगह बताया जा चुका है कि 10 नवंबर से नए नोट आने लगेंगे और बंद हो चुके नोट बदलने के लिए 50 दिन का वक्त है, लेकिन लोग अभी से ये नोट लेना-देना बंद कर चुके हैं. एक ही सवाल बार-बार पूछ रहे हैं.

लोगों की ऐसी हालत देखते हुए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने अपनी वेबसाइट पर 26 पॉइंट्स में जानकारी दी है. RBI ने नोट बैन के पीछे फर्जी करंसी को सबसे बड़ा कारण बताया है. इस पोस्ट में ब्लैक मनी का भी जिक्र है और साफ कहा गया है कि लोगों के पास जितना पैसा है, उन्हें एक्सचेंज में पूरा पैसा मिलेगा. तो देखिए क्या बताया है RBI ने.

1. ये स्कीम क्यों लाई गई?

मार्केट में फर्जी नोट बहुत बढ़ गए हैं. इन्हें बनाने वाले किसी सिक्यॉरिटी फीचर की नकल तो नहीं कर पाए, लेकिन आम जनता असली और नकली नोट में फर्क नहीं कर पाती है. इन नोटों का यूज अवैध और एंटी-नेशनल कामों में हो रहा है. ब्लैक मनी छिपाने के लिए सबसे ज्यादा बड़ी कीमत वाले नोट ही यूज किए जाते हैं. भारत हमेशा से कैश-बेस्ट इकॉनमी रहा है और इसी वजह से फेक करंसी का खतरा ज्यादा है. इन्हें एक झटके में बाहर करने के लिए हजार और पांच सौ के नोट बंद करने की स्कीम लाई गई है.

2. क्या है स्कीम?

8 नवंबर, 2016 के आदेश के मुताबिक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा जारी किए गए 500 और हजार के नोट वापस मांग लिए गए हैं. इस आदेश की वजह से अब इन नोटों से कोई ट्रांजैक्शन नहीं किया जा सकता है. न ही इन्हें फ्यूचर में किसी तरह के यूज के लिए बचाया जा सकता है. इन नोटों को RBI के 19 ऑफिसों, किसी भी बैंक की किसी भी ब्रांच, किसी भी हेड पोस्ट ऑफिस या सब-पोस्ट ऑफिस से बदला जा सकता है.

notes

3. एक्सचेंज करने पर मुझे क्या कीमत मिलेगी?

नोट बदलने के लिए जो जगहें बताई गई हैं, वहां कोई भी नोट देने पर आपको उतना ही पैसा वापस मिलेगा. अगर आप पांच सौ की नोट देते हैं, तो बदले में आपको पांच सौ रुपए ही मिलेंगे.

4. क्या मैं सारा पैसा एक्सचेंज कर सकता हूं?

नहीं. एक्सचेंज करते समय आपको एक बार में चार हजार रुपए से ज्यादा कैश नहीं दिया जाएगा. अगर आप इससे ज्यादा कैश एक्सचेंज करना चाहते हैं, तो ये आपके बैंक अकाउंट में क्रेडिट किया जाएगा.

5. अगर मैं सारा पैसा कैश में सरेंडर कर रहा हूं, तो मुझे सारा पैसा कैश में क्यों नहीं मिल सकता?

ये स्कीम इसलिए लॉन्च ही नहीं की गई है. इसका उद्देश्य ऊपर (1) बताया जा चुका है.

6. मेरी जरूरत के हिसाब से चार हजार रुपए का कैश बहुत ही कम है. मैं क्या करूं?

दूसरी जरूरतों के लिए आप बैंक अकाउंट से पेमेंट कर सकते हैं. इसके लिए चेक और ऑनलाइन पेमेंट, जैसे नेट बैंकिंग, मोबाइल वॉलेट, IMPS ट्रांसफर और डेबिट-क्रेडिट कार्ड्स का यूज किया जा सकता है.

7. अगर मेरे पास बैंक अकाउंट नहीं है तो?

किसी भी बैंक ब्रांच में जाकर KYC जरूरतों के लिए जरूरी दस्तावेज देकर आप कभी भी अपना बैंक अकाउंट खुलवा सकते है.

8. अगर मेरे पास सिर्फ ‘जनधन योजना’ अकाउंट है तो?

जनधन योजना वाला अकाउंट रखने वाला कोई भी शख्स हजार और पांच सौ के नोट एक्सचेंज करवा सकता है. उस पर भी वही नियम और शर्तें लागू होंगी, जो दूसरे अकाउंट वालों के लिए बनाई गई हैं.

9. नोट एक्सचेंज करने के लिए मैं कहां जा सकता हूं?

RBI के किसी भी ऑफिस, कमर्शियल बैंक की किसी भी ब्रांच, स्टेट को-ऑपरेशन बैंकों, किसी भी हेड पोस्ट ऑफिस या सब पोस्ट ऑफिस में नोट एक्सचेंज कराए जा सकते हैं.

10. क्या मैं सिर्फ अपने बैंक की ब्रांच से नोट एक्सचेंज करवा सकता हूं?

चार हजार रुपए तक का कैश एक्सचेंज कराने के लिए आप किसी भी बैंक की किसी भी ब्रांच में जा सकते हैं. आपको बस एक सरकारी वैलिड आईडी प्रूफ साथ ले जाना होगा.

चार हजार से ज्यादा कैश एक्सचेंज कराने के लिए, जो सिर्फ बैंक अकाउंट के जरिए होगा, आपको उस बैंक की ब्रांच में जाना होगा, जिसमें आपका अकाउंट है. आप होम ब्रांच या उसी बैंक की किसी भी ब्रांच में जा सकते हैं.

अगर आप किसी ऐसे बैंक में जाना चाहते हैं, जिसमें आपका अकाउंट नहीं है, तो आपको एक वैलिड आईडी और अपने बैंक अकाउंट की जानकारी साथ ले जानी होगी, ताकि पैसा आपके अकाउंट में ट्रांसफर किया जा सके.

11. क्या मैं अपने बैंक की किसी भी ब्रांच में जा सकता हूं?

हां. आप अपने बैंक की किसी भी ब्रांच में जा सकते हैं.

12. क्या मैं किसी दूसरे बैंक की किसी भी ब्रांच में जा सकता हूं?

हां. आप किसी दूसरे बैंक की किसी भी ब्रांच में जा सकते हैं. ऐसे में आपको कैश एक्सचेंज कराने के लिए एक वैलिड आईडी प्रूफ और अपने अकाउंट की जानकारी ले जानी होगी, ताकि चार हजार से ज्यादा कैश इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर के जरिए आपके अकाउंट में ट्रांसफर किया जा सके.

13. मेरा कोई बैंक अकाउंट नहीं है, लेकिन मेरे रिश्तेदार/ दोस्त का बैंक अकाउंट है. क्या मैं अपने नोट उनके अकाउंट के जरिए एक्सचेंज कर सकता हूं?

हां. आपके जिस रिश्तेदार/दोस्त का बैंक अकाउंट है, अगर वो आपको लिखित इजाजत देता है, तो आप उसके अकाउंट के जरिए कैश एक्सचेंज कर सकते हैं. एक्सचेंज के दौरान आपको अपनी वैलिड आईडी और अकाउंट होल्डर से मिली लिखित इजाजत बैंक को दिखानी होगी.

14. क्या मुझे खुद बैंक जाना पड़ेगा या मैं किसी और को भेज सकता हूं?

अगर आप खुद ब्रांच जाते हैं, तो बेहतर होगा. अगर ऐसा मुमकिन नहीं है, तो आप इसकी लिखित जानकारी के साथ किसी और को भेज सकते हैं. एक्सचेंज के समय आपके प्रतिनिधि को वो लेटर और अपनी वैलिड आईडी दिखानी होगी.

15. क्या मैं ATM से कैश निकाल सकता हूं?

बैंकों को अपने ATM जांचने में थोड़ा वक्त लगेगा. जैसे ही ATM काम करने लगेंगे, आप उससे पैसे निकाल सकेंगे. 18 नवंबर तक आप ATM से एक दिन में अधिकतम दो हजार रुपए निकाल सकेंगे. 19 नवंबर से ये लिमिट बढ़कर चार हजार रुपए हो जाएगी.

16. क्या मैं चेक से कैश निकाल सकता हूं?

हां. आप विदड्रॉल स्लिप या चेक से कैश निकाल सकते हैं. ऐसे में आप एक दिन में अधिकतम 10 हजार रुपए और सप्ताह में अधिकतम 20 हजार रुपए निकाल सकते हैं. यानी अगर आप एक दिन 10 हजार रुपए निकालते हैं, तो बचे 6 दिनों में सिर्फ 10 हजार और निकाल सकेंगे. इस लिमिट में ATM से किया गया ट्रांजैक्शन भी शामिल होगा. ऐसा 24 नवंबर तक होगा और उसके बाद इन लिमिट्स का रीव्यू किया जाएगा.

17. क्या मैं ATM, कैश डिपॉजिट मशीन या कैश रीसाइकलर में नोट डिपॉजिट कर सकता हूं?

हां. नोटों को कैश डिपॉजिट मशीन/ कैश रीसाइकलर के जरिए डिपॉजिट किया जा सकता है.

18. क्या मैं पेमेंट के लिए इलेक्ट्रॉनिक मोड (NEFT/RTGS /IMPS/ इंटरनेट बैंकिंग/ मोबाइल बैंकिंग वगैरह) का यूज कर सकता हूं?

हां. आप किसी भी तरह के पेमेंट के लिए NEFT/RTGS /IMPS/ इंटरनेट बैंकिंग/ मोबाइल बैंकिंग वगैरह या किसी भी दूसरे इलेक्ट्रॉनिक/ नॉन कैश मोड का यूज कर सकते हैं.

19. नोट एक्सचेंज करने के लिए मेरे पास कितना वक्त है?

ये स्कीम 30 दिसंबर, 2016 को बंद होगी. नोट एक्सचेंज करने के लिए जो भी जगहें बताई गई हैं, वहां 30 दिसंबर तक नोट एक्सचेंज किए जा सकते हैं. जो लोग 30 दिसंबर तक नोट एक्सचेंज नहीं कर पाएंगे, उन्हें RBI के सीमित ऑफिसों में जरूरी दस्तावेज दिखाकर नोट एक्सचेंज करने का मौका दिया जाएगा.

20. मैं अभी भारत में नहीं हूं. मुझे क्या करना चाहिए?

अगर आपके पास भारत में हजार और पांच सौ के नोट हैं, तो आप लिखित इजाजत देते हुए भारत में किसी व्यक्ति को अथॉरिटी बना सकते हैं, जो नोटों को आपके बैंक अकाउंट में डिपॉजिट कर सके. ऑथराइज किए गए व्यक्ति को नोट, वैलिड आईडी प्रूफ और आपके लिखे लेटर के साथ बैंक ब्रांच जाना होगा. वैलिड आईडी प्रूफ के तौर पर आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आईडी कार्ड, पासपोर्ट, नरेगा कार्ड, पैन कार्ड या किसी सरकारी विभाग द्वारा जारी किया गया कार्ड दिखाया जा सकता है.

21. मैं NRI हूं और मेरे पास NRO अकाउंट है. क्या एक्सचेंज वैल्यू मेरे अकाउंट में ट्रांसफर की जा सकती है?

हां. हजार और पांच सौ के नोट आप अपने NRO अकाउंट में डिपॉजिट कर सकते हैं.

22. मैं विदेशी पर्यटक हूं और मेरे पास हजार और पांच सौ के नोट हैं. मैं क्या करूं?

इस नोटिफिकेशन के 72 घंटों के अंदर एयरपोर्ट एक्सचेंज काउंटर्स पर इन नोटों का यूज करते हुए आप पांच हजार रुपए के बराबर फॉरेन एक्सचेंज खरीद सकते हैं. इसके लिए आपको इन नोटों को खरीदने का मौजूदा प्रूफ दिखाना होगा.

23. मुझे इमरजेंसी (हॉस्पिटल, ट्रैवेल, लाइव सेविंग मेडिसिन) में कैश की जरूरत है. मैं क्या करूं?

सरकारी हॉस्पिटल में पेमेंट करते समय आप हजार और पांच सौ के नोट इस्तेमाल कर सकते हैं. सरकारी बस स्टैंड पर बस टिकट खरीदने, रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के टिकट खरीदने और एयरपोर्ट पर एयर टिकट खरीदने के लिए आप इन नोटों का इस्तेमाल कर सकते हैं. हालांकि, ऐसा नोटिफिकेशन आने के 72 घंटों तक ही किया जा सकेगा.

24. आईडी प्रूफ के तौर पर क्या दिखाना होगा?

इनमें से कोई भी एक वैलिड आईडी प्रूफ हो सकता है: आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आईडी कार्ड, पासपोर्ट, नरेगा कार्ड, पैन कार्ड, किसी सरकारी विभाग द्वारा जारी किया गया आईडी कार्ड.

25. इस स्कीम के बारे में और जानकारी मुझे कहां से मिल सकती है?

और जानकारी RBI की वेबसाइट (www.rbi.org.in) और भारत सरकार की वेबसाइट (www.finmin.nic.in) से ली जा सकती है.

26. अगर मुझे किसी तरह की कोई परेशानी है, तो मुझे किससे बात करनी चाहिए?

आप ईमेल के जरिए या टेलीफोन नंबरों 022 22602201/022 22602944 पर कॉल करके RBI के कंट्रोल रूम से संपर्क कर सकते हैं.

इन तस्वीरों को देखने के बाद आप पब्लिक प्लेस में कभी नहीं सोना चाहेंगे

आपने पब्लिक ट्रांसपोर्ट में यात्रा करते समय ऐसे कई लोगों को देखा होगा जिन्हें गाड़ी में बैठते ही पट से नींद आने लगती है. कई लोग सिनेमा हाल में बैठते ही सो जाते हैं तो कुछ लोगों को पार्क में ठंडी हवा लगते ही नींद आ जाती है.

ऐसे लोगों के ऊपर आसपास के शोरगुल, भीड़भाड़ का भी कोई असर नहीं पड़ता. उन्हें तो बस सोना है तो सोना है. आपको याद होगा अभी कल ही संसद में चर्चा के दौरान राहुल गाँधी सोते पाए गए थे.

बहरहाल, नींद आना अच्छी बात है पर पब्लिक प्लेस पर नहीं. सोते समय आप कैसी मुद्रा बनाते हैं, ये आपको भी होश नहीं रहता. उधर सोशल मीडिया और मोबाइल कैमरों का ज़माना है, लोग तस्वीर खींच लेते हैं, खामखाँ मजाक बन जाता है.

काले धन को परमानेंट काला ,और कैसे पड़ेगी गरीबो पर मार और क्या है इसके पीछे राजनैतिक षड्यंत्र

मोदी का कहना है अगर नोट बंद करने की जानकारी इसलिए गुप्त रखी गई ताकि काले धन वालो को मौका न मिल सके अपने पैसे ठिकाने लगाने का . खैर एक छोटी से बात जान लेते है अम्बानी मोदी का जीजा आर बी आई का गवर्नर , वाणिज्य मंत्री है का साला . तो मिया आपको लगता है की सारी सूचना एकदम गुप्त रखी गई थी या पहले से इन पूंजीपतियो को कह दिया गया था कि अपने धन को ठिकाने लगाने के लिए वाव्य्स्था कर ली गई थी ?? बिलकुल कर ली गई होगी

नोट बंद हो गए है अब इसकी सबसे बड़ी मार गरीबो और अनपढ़ लोगो पर पड़ रही है बहुत सारे छोटे छोटे दुकानदार अब ये नोट नहीं ले रहे है और जो जयादा धूर्त है वो लोगो को पांच सौ के बदले चार सो का सामान दे रहे है और लोग मजबूरी में ले रहे है , पट्रोल पम्प आदि पर सौ पचास का नोट यह कह कर नहीं ले रहे है की उनके पास चेंज नहीं है या तो सारे पैसो का सामान या पेट्रोल लो या नहीं मिलेगा

इसके अलावा बैंको में जमा कराने की प्रक्रिया भी काफी कठिन होगी सो पूंजीपति पहले से ही बैंक कर्मचारियो से मिल लिए है और एक लाख के बदले ५० -७० हजार पर डील तय हो गई है

इसके अलावा करंट अकाउंट माफिया बहुत जयादा सक्रिय हो गया है यानी ये पूंजीपति लोग छोटे मोटे कम्पनियो को पांच से दस लाख रूपये दे रहे है ताकि वो लोग अपने अकाउंट में पैसा डाल कर टैक्स आदि की अदायगी के बाद पचास से ६० % तक वापिस ले सके इसमें खाता धारक कम्पनी को बीस से तीस % की बचत हो जाएगी

अब यह समझ लेते है की यह घोषणा वैसे तो कभी भी हो सकती थी लेकिन यु पी पंजाब और अन्य राज्यों में आने वाले चुनाव से पहले ही क्यों की गई ?? इसका एक मुख्य कारण यह माना जा रहा है की यु पी चुनाव में समाजवादी और बहुजन समाज पार्टी के लोगो के पास जो कला धन होगा उसका इस्तेमाल न हो सके और सफ़ेद धन इनके पास सिर्फ रोटिया खाने के लिए ही है ऐसा भाजपा का मानना है और जिसका परिणाम यह होगा की ये लोग चुनाव प्रचार सही ढंग से नहीं कर सकेंगे और हार जाएंगे .. खैर यह तो वही बात है जैसे बिल्ली के ख्वाब में चिच्ड़े यानी भाजपा की यह मनसा कभी पूरी नहीं होगी . और ये लोग समझते है की ये लोग पुब्जिपतियो की मदद से पैसा खर्च कर चुनाव जित जाएंगे .

खैर इस प्रक्रिया से यह बात तो साबित हो गई है भाजपा देश को चलाने के हर क्षेत्र में फ्लॉप हो गई है , गरीबी बेरोजगारी , महंगाई को कम नहीं कर पाई है बल्कि भाजपा के पूंजीपतियो ने अपना सारा पैसा खर्च कर गेहू दाल , चीनी सब स्टोक कर लिया है और अब इन सामानों को दुगने दामो पर बेचेंगे और असल मुनाफ़ा कमायंगे
जनता के ध्यान को खींचने के लिए यह मोदी का एक विफल प्रयास है या कहे की एक षड्यंत्र है जो कभी सफल नहीं हो सकता और मोदी जिस काले धन को लाने की बात कर रहे थे उसमे भी विफल है और इससे देश के पूंजीपतियो को को फर्क नहीं पड़ेगा , बल्कि सिर्फ गरीब , मजदूर मारे जाएंगे

देख लीजिये किस तरह हड़कंप आता है

रात को यहां पहुंचे लोग

500 और हजार के नोट बंद होने से नौकरी वाले तो चिल्ड आउट हैं. लेकिन ‘हड़कंप’ अगर कोई चीज़ होती है तो वो उनमें मचा है जिनके पास ब्लैक मनी है.

‘ब्लैक मनी’ थोड़ा कंफ्यूज करने वाला टर्म है. ब्लैक मनी सिर्फ वो नहीं है जो घूस के तौर पर लिया जाता है. वो भी ब्लैकमनी है जिस पर टैक्स नहीं दिया जाता. आप जानते हैं कि अपने यहां बहुत सारे ‘बिजनेसमैन’ सिर्फ कैश में डील करते हैं. प्रॉपर्टी डीलर्स का तो सबका मालूम है.

तो हड़कंप इस तरह मचा कि जिनके पास खूब सारा रोकड़ा पड़ा है, वो टाइम की परवाह किए बिना बुधवार को जूलरी खरीदने पहुंच गए. कनॉट प्लेस के तनिष्क जूलर्स शोरूम पर रात 12:30 बजे जबरदस्त भीड़ थी. बहुत सारे लोगों ने अपने काले धन को सफेद बनाने के लिए सोने के ज़ेवर खरीदे. रात दो बजे तक लोग सोना खरीद रहे थे और काले धन को सफेद ही क्या, सुनहरा भी बना रहे थे.

तनिष्क वालों को इस स्थिति का अंदाजा रहा होगा, इसलिए उन्होंने देर रात तक अपना शोरूम खुला रखा. मीडिया को देखकर सिक्योरिटी गार्ड्स ने शटर गिरा दिया. 2 घंटे बाद शटर खुला और 50 से ज्यादा लोग हौले से वहां से निकल लिए.

मीडिया ने उनसे बात करने की कोशिश की, लेकिन सब मुंह चुराकर अपनी कार की ओर बढ़े और वहां से निकल लिए. कुछ कारों पर तो NDMC के ऑफिशियल स्टिकर्स भी लगे हुए थे.

11/06/2016

लड़कों को भरे शरीर वाली लड़कियां अच्छी लगती हैं, थोड़ा वजन बढ़ा लो'

हर संडे जब भी कॉलम लिखने बैठती हूं, औरतों के बारे में सोचती हूं, तो सबसे पहले मां की याद आती है. हर दोपहर पापा का टिफिन तैयार होकर जाता. गरमागरम. हर दोपहर दादाजी और हम बच्चे लंच करने बैठते. मां किचन से गरम-गरम फुल्के निकालकर लातीं. दादाजी का नियम था, प्लेट में रोटी गरम-गरम आए. जब पिछली रोटी का आखिरी निवाला मुंह में जाए, तभी अगली रोटी आंच से उठाकर प्लेट में रखी जाए. जब दादाजी (और घर के बाकी लोग) खा चुकते, तब मां के खाने का नंबर आता.

कभी-कभी ऐसा दिन भी आता कि कोई अचानक घर पर टपक पड़ता या फिर घर के बाकी लोग ही ज्यादा खा लेते. खाना कम पड़ जाता. कभी दाल, कभी सब्जी. तो जो भी बचता, मां उसे खा लेती. पिछली रात के बचे हुए खाने के साथ. इसमें कोई बेचारगी नहीं रहती कि बचा-खुचा खाने को मिल रहा है. ये एक आदत सी थी. एक माना हुआ सच सा था कि मां को आखिर में ही खाना है.

मैं परिवारों के बीच ज्यादा नहीं रही हूं, पर शायद हर जॉइंट फैमिली में ऐसा ही होता होगा. कम से कम अपने रिश्तेदारों के बारे में तो कह ही सकती हूं कि बहुएं सबको खिलाकर खाने बैठती हैं. अपनी जानकारी में मैंने ऐसा कोई घर नहीं देखा, जहां मां की पसंद का खाना बनता हो. असल में मालूम ही नहीं होता कि मां की पसंद है क्या. क्योंकि, हर बार मम्मी बच्चों से ही आकर पूछती हैं, ‘क्या खाओगे’. जो बच्चे कहते हैं, वही बन जाता है. कभी सब्जियां न हों, तो परवल और लौकी भी बन जाते हैं. लेकिन, कभी यूं नहीं होता कि मां कहे, आज ‘मुझे’ राजमा खाने का मन है, राजमा बनाती हूं. या फिर पुरुष पत्नी से, या बच्चे मां से पूछें, ‘आज क्या खाने का मन है?’

हमारे घरों में खाना और उससे मिलने वाले पोषण का केंद्र कभी औरतें नहीं होतीं. दूध, मेवे और फल अगर घर में आते हैं, तो इसलिए कि बच्चे खाएंगे. अगर आपके घर में ऐसा होता है, तो आपको बधाई.

लेकिन यहां बात सिर्फ परिवार के स्ट्रक्चर के अंदर औरत के स्थान की नहीं है. बात ये है कि औरतें अपनी हेल्थ के बारे में कितना और किस तरह सोचती हैं. जब सोचती हैं तो इसके मायने क्या होते हैं. क्या स्वस्थ रहना एक समाज के तौर पर हमारा और हमारी औरतों का लक्ष्य है?

नहीं.

बीते दिनों अपने डॉक्टर से हुई एक रेगुलर सी मीटिंग में उसने मुझसे पूछा, ‘तुम्हारा वज़न तो नहीं बढ़ा है?’ मैंने कहा ‘हां, 2 किलो बढ़ गया है’. डॉक्टर का झट से जवाब आया, ‘वजन मत बढ़ने दो. ये लड़कियों की सेल्फ-एस्टीम के लिए बड़ा खराब होता है.’

सेल्फ एस्टीम. यानी खुद पर भरोसा. लड़कियों का वजन बढ़ने पर खुद पर भरोसा, खुद पर कॉन्फिडेंस क्यों टूटता है? इसलिए कि वो ‘अस्वस्थ’ हो जाएंगी? नहीं. बल्कि इसलिए कि वो भद्दी दिखेंगी.

मोटी लड़कियों को लेकर एक अजीब सी अस्वीकार्यता है लोगों के मन में. वजन ज्यादा होगा, तो अच्छी नहीं दिखोगी. वजन ज्यादा होगा, तो शादी नहीं होगी. वजन ज्यादा होगा, तो लोग हंसेंगे. कभी किसी को ये कहते नहीं सुना कि वजन ज्यादा होगा, तो हॉर्मोन्स पर फर्क पड़ेगा. पीरियड के साइकिल पर फर्क पड़ेगा, जिससे दिमाग पर असर पड़ेगा. वजन ज्यादा होगा, तो स्ट्रेस बढ़ेगा. शुगर बढ़ सकती है. ब्लड प्रेशर या दिल की तकलीफ हो सकती है. प्रेग्नेंसी में दिक्कतें आ सकती हैं. पीरियड या प्रेग्नेंसी के समय पाइल्स का खतरा हो सकता है.
और जो चुनिंदा लड़कियां फिटनेस को लेकर जागरूक रहती हैं, उनसे बार-बार पूछा जाता है, ‘तुम तो मोटी नहीं लगती, फिर जिम क्यों जाती हो?’ या फिर, ‘तुम्हें एक्सरसाइज की क्या जरूरत है?’ ‘तुम इतनी ओवरवेट तो नहीं लगतीं?’

पॉपुलर कल्चर (पढ़ें बॉलीवुड या मॉडलिंग) में अक्सर लड़कियों की फिटनेस को उनके दुबले होने से जोड़ा जाता है. जिम में घुसती हूं, तो चारों तरफ वॉलपेपर में एक्ट्रेसेस की तस्वीरें दिखती हैं. हेल्थ मैगज़ीनों के कवर पर एक्ट्रेसेस की तस्वीरें दिखती हैं. लड़कियों को बताया जाता है कि फलां एक्ट्रेस ने किस तरह एक महीने में या एक साल में इतने किलो घटा लिए. और देखो, अब वो कितनी सुंदर लगती हैं. ‘सुंदरता’ और ‘सेक्स अपील’ की इस दुनिया में कभी औरतों को इस बारे में नहीं बताया जाता कि वजन घटाने (या बढ़ाने) के टारगेट में उनकी सेहत में कितना सुधार हो गया. वजन घटाना एक कॉस्मेटिक की तरह है. इस्तेमाल करो और सुंदर हो जाओ.

कमाल की बात ये है कि जो लड़कियां अंडरवेट हैं, उनसे लोग कम ही पूछते हैं कि वजन बढ़ाने के बारे में क्या सोचा है. बल्कि हर दूसरी लड़की ये जरूर कह जाती हैं कि तुम्हारी पतली कमर देखकर जलन होती है. और अगर वजन बढ़ाने की सलाह मिलती भी है, तो ये कहकर कि इतनी दुबली लड़कियां मर्दों को अच्छी नहीं लगतीं. मर्दों को थोड़ा भरे शरीर वाली लड़कियां अच्छी लगती हैं. इस पूरी बातचीत में सेहत घास चरने चली जाती है. और मैं बात कर रही हूं पढ़ी-लिखी, औसत कमाई वाले घरों से आने वाली लड़कियों की.
हम एक अमीर देश नहीं हैं. लाखों बच्चे कुपोषण का शिकार हैं, लेकिन सिर्फ बच्चे ही नहीं, उनकी मांएं भी कुपोषण का शिकार हैं. और इसीलिए बच्चे कमजोर पैदा होते हैं. ये बात है उस तबके की, जो पौष्टिक खाना अफोर्ड नहीं कर सकते. लेकिन जिस तबके के लोग घर में सुकून से दो वक़्त का खाना खा भी रहे हैं, वहां भी सारे पोषण का केंद्र या तो पुरुष हैं, या बच्चे. और अगर पिछड़ी मानसिकता वाले घरों की बात करें, तो बच्चों में भी महज लड़के.

ऐसे में हमारे कल्चर में शामिल व्रतों की परंपरा औरतों की सेहत में और चार-चांद लगा देती है. उन औरतों की, जिनके कमजोर कंधों पर सदियों की बेतुकी परम्पराओं को ढोने की जिम्मेदारी है.

थोड़ा दिमाग लगाकर सोचिए. आपके इस शरीर को, जो हर महीने खून बहाता है, जो बच्चे पैदा करने के पहले 9 महीने उन्हें पोषण देता है, जो मीनोपॉज के बाद कमजोर होने लगता है, उसे ‘परम्पराओं’ और ‘सुंदरता’ की जरूरत है, या पोषण की.

सौजन्य से
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