11/11/2016

शब्दों का प्रयोग कितना सहज है,लोग कुछ भी कह सकते है

शब्दों का प्रयोग कितना सहज है हम सभी यह जानते हैं किन्तु शब्द ही असहज हो तो? हमारे समाज में गालियाँ देने का प्रचलन बहुत है। जिसे देखो गाली देता मिल जाता है। आजकल यह छोटे बच्चों के मुँह से ज्यादा सुनी जाती हैं। जिसपर माँ से लेकर आस-पड़ोसी तक बड़े खुश होते हैं। लेकिन यदि बच्चा बड़ा है तब गाली दे तो असहनीय हो जाता है। कमाल की बात यह है कि देश की आधी आबादी यानी स्त्रियाँ इन शब्दों से थोड़ा परहेज रखती हैं।

सामान्य घर की महिलाएं गाली दो ही अवसर पर देती है- किसी के विवाह पर, जब सिर्फ स्त्री समुदाय इक्कट्ठा होता है या लड़ाई के समय। स्त्री पक्ष के लिए गाली देना भी गलत माना जाता है। हाँ यह बात अलग है कि आजकल पढ़ने-लिखने वाली लड़कियां नारीवाद का परचम लहराती हैं और खुद भी गाली देती हैं। जिससे वह खुद को पुरुषों के समकक्ष समझती हैं। उतना ही स्वतन्त्र और बिंदास दिखाना चाहती हैं इसलिए वह भी आज खुल कर गालियाँ देती हुई मिल जाएँगी। मुद्दा यह नहीं है कि लड़कियां गाली दें या न दें। बात यह है कि क्या वह इस बात को समझती हैं कि वे खुद अपनी जाति, समुदाय का अपमान करा रही हैं?

भारतीय समाज में प्रचलित अधिकतर गालियाँ स्त्री के यौन-अंगों से सम्बंधित हैं। समाज जब आदिम समय में जी रहा था उस समय ऐसी अपशदों की भाषा नहीं होती थी क्योंकि वहां स्त्री को बराबर मान दिया जाता था। जैसे-जैसे समाज ने निजी संपत्ति का विकास किया महिलाएं घर में बंद होती गई। स्त्री, एक पुरुष के अधीन बना दी गई। घर में बंद स्त्री के साथ परिवार की इज्ज़त को जोड़ा गया। आदिम समाज में स्त्री को न केवल शारीरिक संबंधों की आज़ादी थी वरन वह अपने सभी कार्यों में आत्मनिर्भर थी। अब सभ्यता ने उसे परिवार पर निर्भर रहना सिखाया।

स्त्री किसी एक दिन गुलाम बन गई हो ऐसा भी नहीं था यह कई हजार वर्ष चलने वाला सिलसिला था। खैर अब स्त्री परिवार की मान मर्यादा की रक्षिता मानी गई। इसलिए जब भी किसी समुदाय को अपने अधीन करना होता तो उसकी स्त्रियों को उठा लेता, बलात्कृत करता, बंदी बनाता जिससे उस स्त्री के किसी और के साथ शारीरिक सम्बन्ध हैं इस बात को कहा जा सके क्योंकि समाज में ऐसी मनाही थी। जो समुदाय या परिवार जन कुछ कमजोर होते थे वे यह सब कह कर ही अपना काम चला लेते हैं कि तेरी माँ या बहन के साथ सम्बन्ध बना लूंगा और सभी बातें। ‘चूतिया’ एक आम गाली जो स्त्री की योनि से ही जुड़ी है। इसका आजकल बहुत प्रयोग होता है। योनि के नाम पर बनी यह गाली व्यक्ति के मूर्ख होने का संकेत देती है। और यह बनी है स्त्री के उस अंग से जो पुरुष से उसे भिन्न करता है। यानि स्त्री मूर्ख होती हैं इस बात को यह शब्द हमें बताता है। पूरे स्त्री समाज पर प्रहार यह शब्द कितना पितृसत्तात्मक है यह कोई सोचता भी नहीं।

एक ऐसी ही गाली है ‘बहनचोद’ है। कितनी अजीब बात है कि एक तरफ हमारे समाज में खाप पंचायत है। शिव सेना है जो बात-बात पर धर्म संस्कृति का हवाला देती है। स्त्री को पार्क में किसी के साथ यदि यह देख ले तो डंडा लेकर पीटने लगते हैं। वही लोग जो स्त्री को देवी मानकर उसके पूजने की बात करते हैं माँ और बहनचोद कहने में शर्म महसूस नहीं करते। ऐसे लोगों को यदि आप टोक दें तो उनका अहम जाग जाता है। उल्टा आपको सुना देंगे। तर्क करेंगे कि यह हमारे समाज की भाषा है ऐसा ही बोलते हैं हम। यह सही है कि आप ऐसा ही बोलते हैं पर आप कैसे  हैं यह भी हम अच्छे से जानते हैं।

आपकी महान संस्कृति महिलाओं की भक्षक है उन्हें घर में बंद किया जाता है। प्रेम करने की छूट तो क्या यहाँ तो मीरा को भक्ति का भी अधिकार नहीं दिया गया। इसी महान संस्कृति में महिलाओं को ज़िंदा जलाया जाता है। लड़की है यह जानते ही मार दिया जाता है। आपकी महान सभ्यता और संस्कृति महिलाओं के शोषण पर टिकी हुई है और मुँह से औरतों के लिए अपशब्द निकालते लोग क्या महान संस्कृति के वाहक हैं? आपने कभी सोचा है कि जब आपने इन शब्दों का प्रयोग किया है तब हम क्या महसूस करती हैं? कितना विद्रोह उमड़ता है भीतर।

आपने जब चाहा आपने भाषा में हमारा सम्बन्ध किसी भी सड़क चलते के साथ जोड़ दिया और यही हम किसी को आँख उठा कर देख भी लें तो आपको आपत्ति होती है। पिछले साल की घटना है केरल की एक लड़की को उसके माँ-बाप ने घर के एक कमरे में इसलिए बंद कर दिया था क्योंकि उसने प्रेम करने की गलती की थी। ताजी हवा-पानी से बेदखल वह लड़की कुछ सालों में अपना मानसिक संतुलन खो देती है।

यह किसी एक राज्य या घर की बात नहीं है पूरे भारतीय समाज की यही दशा है  यहाँ प्रेमी राधा-कृष्ण को घर-घर में पूजे जाएंगे, प्यार किया तो डरना क्या कहती अनारकली तो हिट हो सकती है पर अपने घर की बेटी किसीसे बात करती है, सहनीय नहीं है। और आप अपनी भाषा के माध्यम से अपनी उन स्त्रियों का जिन्हें आप पर्दें में रखते हैं सबके सामने नंगा कर देते हैं। कैसा समाज है यह विरोधों से भरा हुआ। आजकल स्त्रियाँ भी इन गालियों का प्रयोग कर रही हैं। बिना इस बात को सोचे हुए कि ये  उनके देहवादी विमर्श को कितना खोखला कर देता है। आप देह मुक्ति की बात करेंगे और साथ ही किसी को अपनी भाषा में जबरन किसी के साथ जोड़ देंगे।

वेश्या के लिए समाज में ‘रंडी’ शब्द प्रचलित है। वेश्याएं समाज से जबरन अगवा की गई वह स्त्रियाँ होती हैं जिन्हें समाज स्वीकार नहीं करता। ये वो बहिष्कृत स्त्रियाँ हैं जिन्हें समाज स्वीकार नहीं करता, जबकि इन्हें पुरुष समाज ने ही अपने पैसे, देह और अन्य निजी कारणों से देह-व्यापार में धकेल दिया। वेश्या के साथ यही समस्या है वह समाज की यौन-शुचिता की मानसिकता को समाज के ही कारण खो देती है। समाज में स्त्री के लिए यौन-शुचिता की अवधारणा प्रचलित हैं एक बार अपने कोमार्य को खो दिया तो समाज आपको जीने नहीं देता यही कारण है कि बलात्कार की शिकार महिलाओं को समाज ताने देता है।

‘कहीं मुँह दिखाने लायाक नहीं छोड़ा’ यह सुनाता है...
मजेदार बात हैं कि जिस भारतीय समाज में इतने बंधन हैं उसी में स्त्री की यौनिकता को हमेशा सबके सामने बोला जाता है। रंडी वेश्या के लिए प्रचलित शब्द स्त्री के लिए अक्सर प्रयुक्त किया जाता है। सड़क, चौराहें कहीं भी यदि किसी स्त्री को अपमानित करना है तो उसे रंडी कहना ही काफी है। स्त्री के लिए बना एक शब्द स्त्री के लिए ही खराब हो जाता है। किसी भी स्त्री को नीचा दिखाना हो तो उसे रंडी कह दो। स्त्री जिसे आप देवी मानते हैं, दुर्गा काली की उपाधि देते हैं उसने यदि किसी से शारीरिक सम्बन्ध बना लिया तो आप उसे गाली देंगे।

वेश्यावृत्ति का अपना एक इतिहास है। रंडी शब्द मेरी समझ के अनुसार रांड से बना है जिसका मतलब होता है जिसका पति न हो। वेश्या किसी एक की नहीं होती। ऐसे ही जिस स्त्री को यह कहा जाता है, माना जाता है कि उसके किसी के साथ सम्बन्ध हैं। क्या कभी किसी पुरुष के लिए इस शब्द का प्रयोग होते सूना गया? क्या शारीरिक सम्बन्ध के लिए स्त्री ही जिम्मेदार है? यदि पुरुष का सम्बन्ध बनाना गलत नहीं है तो स्त्री का कैसे हो सकता है ? पुरुष किसी पत्थर से तो सम्बन्ध नहीं बनाता फिर ऐसा भेदभाव क्यों?

सभी गालियाँ स्त्री से जुडी होती हैं और उनका सम्बन्ध स्त्री की यौनिकता, उसके कामांगों से होता है। स्त्री को देवी मनाने का ढोंग करने वाला तथाकथित भारतीय समाज वास्तव में उसको कभी सम्मान देता ही नहीं। हर घर में चाहे वह कितना पढ़ा-लिखा परिवार हो या गरीब इन गालियों का प्रयोग वहां आसानी से मिल जाता है। स्त्री को लगातार इन शब्दों के माध्यम से नीचा दिखाने की कोशिश की जाती है। उसे हर बार इस बात को बताया जाता है कि तुम सिर्फ एक गाली हो जिसका सम्बन्ध कभी भी किसी से भी जोड़ा जा सकता है।

और हैरानी की बात है कि स्त्री समाज खुद इस बात को समझना नहीं चाहता कि यह शब्दावली उसके जहन में क्यों उतारी जा रही है। ऐसा नहीं है कि वह इसका अर्थ नहीं जानती पर प्रयोग करती है लगातार यह सोच कर कि क्या फर्क पड़ता है, पर इन छोटी-छोटी बातों से ही हम अपने अस्मिता कि लड़ाई को दिशाहीन कर रहे हैं। सदियों से जिस सत्ता ने हमें बंद रखा, मारा पीटा, हत्या की हम जान बूझ कर उस सत्ता जैसे ही बन रहे हैं और कहीं न कही हम पितृसत्ता की उस साजिश को पूरा कर रहे हैं जो चाहती है कि हम गुलाम रहें सब जानते हुए भी।

11/10/2016

कालाधन साबित होने पर 10 लाख जमा करवाने वाले को मिलेंगे सिर्फ 73 हजार

पांच सौ और एक हजार रुपए के नोट अचानक बंद होने के बाद से लोगों के अंदर कालेधन को लेकर डर बैठ गया है। काले धन के बड़े कारोबारी अगर 500 और 1000 रुपए नोट बैंक में जमा नहीं करते हैं तो उनकी तिजोरियों में पड़ी नोटों की गड्डियां रद्दी की ढेर बन जाएंगी।


यदि बैंक खाते में जमा किया तो देर-सवेर आयकर विभाग की नजरों में रहेंगे। जानबूझकर टैक्स चोरी करने वाले ऐसे काले कारोबारियों को न सिर्फ 30 फीसदी टैक्स और 200 फीसदी पेनाल्टी देनी पड़ेगी। साथ ही छह महीने से लेकर सात साल तक की जेल भी हो सकती है।
10 नवंबर से 30 दिसंबर के दौरान ढाई लाख रुपये से अधिक राशि किसी बैंक खाते में जमा होने पर उसकी सूचना आयकर विभाग को दी जाएगी। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने साफ कहा कि सरकार की 1000 रुपए के नोट बंद करने और 500 रुपए के मौजूदा नोट को बंद कर नया नोट लांच करने की यह पहल किसी तरह से माफी योजना नहीं है।

पुराने नोट बैंक में जमा करने का मतलब यह नहीं है कि किसी व्यक्ति को कानून से छूट मिल जाए। आयकर कानून अपना काम करेगा। खास बात यह है कि अगर काला धन रखने वाला कोई व्यक्ति किसी और व्यक्ति के खाते में राशि जमा करता है या फिर किसी को अपनी रकम देकर बैंक में भेजता है तो भी वह कानून की नजरों से बच नहीं पाएगा। वित्त मंत्रालय के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति अपने या अपने किसी जानकार के खाते में 10 लाख रुपए या इससे अधिक राशि जमा करता है तो उसे कालाधन और टैक्स की चोरी माना जाएगा और इसकी जांच की जाएगी।


अगर कोई व्यक्ति बैंक में 10 लाख रुपए जमा करवाता है और ये साबित करने में नाकाम रहता है कि वो जमा पैसा कालाधन नहीं है तो उसे भारी भरकम जुर्माना देना होगा। सबसे पहले 10 लाख की रकम से 30.09 फीसदी की दर से 3,09,000 रुपए इनकम टैक्स के तौर पर काट लिया जाएगा। इसके बाद सरकार इसपर 200 फीसदी के हिसाब से 6,18000 रुपए पेनाल्टी के तौर पर काट लेगी। यानी कुल मिलाकर 10 लाख रुपए में से 9, 27000 रुपए इनकम टैक्स और पेनाल्टी के तौर पर कट जाएगा। यानी 10 लाख रुपए में से सिर्फ 73 हजार रुपए बचेंगें। इसके साथ ही सीआरपीसी के तहत मुकदमा चलाया जाएगा। अगर साबित हो गया कि ये काला धन है तो अधिकतम 7 साल की सजा भी हो सकती है।

अज़गर की डिलीवरी

नाइजीरिया में रहने वाले एक शख्स का बछड़ा गायब हो गया था। उसकी बहुत तलाश की गई लेकिन नहीं मिला। बिछड़ा ढूंढने के वक्त जब अजबर मिला तो उसे देखकर वह दंग रह गया। उसका पेट बहुत फूला हुआ था।

उसे लगा कि सांप ने उसे निगल लिया है। लोगों की मदद से उसने बछड़े को बाहर निकालने के लिए अजगर का पेट काट दिया। उसके बाद जो निकला उसे देखकर सबके होश उड़ गए। पेट में दर्जनों अंडे मौजूद थे। फिर लोगों को समझ आया कि जानवर को खाने से बल्कि से उसका मोट नहीं था। ऐसा इसलिए था क्योंकि वो pregnant थी।

सोशल मीडिया पर लोग इस सांप को लेकर अपना दुख जाहिर कर रहे हैं। इसके शरीर की लंबाई को देखकर लोग इसे Anaconda या African Rock Python बता रहे हैं। बता दें स्थानीय इस बात से काफी खुश हैं कि इलाके में 100 से ज्यादा अजगर जन्म लेने से बच गए। नाइजीरिया में यह पहला केस नहीं है जब किसी प्रेगनेंट सांप को मारा गया हो। 1950 में लोगों ने ऐसा ही एक 7 मीटर लंबे सांप को मारा था। 

आपको बता दें कि अफ्रीकन रॉक ज्यादातर बंदर, छिपकली और मगरमच्छ को मारकर खाते हैं। वहीं कुत्ते, चूहे, बकरी और कभी कभार तो शेर, चीते, और तेंदुए के बच्चे भी इनका शिकार हो जाते हैं।
 

11/09/2016

नोट बैन पर 25 सवाल-जवाब, जो RBI चाहता है कि आप जान लें

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नोट बैन पर 25 सवाल-जवाब, जो RBI चाहता है कि आप जान लें

हजार और पांच सौ के नोट बैन होने के बाद से जनता बौराई हुई है. ये अपने यहां की पुरानी खाज है. किसी चीज के बंद होने पर लोग इतना पैनिक हो जाते हैं कि लाख समझाने के बावजूद हुसड़ियाए रहिते हैं. हर जगह बताया जा चुका है कि 10 नवंबर से नए नोट आने लगेंगे और बंद हो चुके नोट बदलने के लिए 50 दिन का वक्त है, लेकिन लोग अभी से ये नोट लेना-देना बंद कर चुके हैं. एक ही सवाल बार-बार पूछ रहे हैं.

लोगों की ऐसी हालत देखते हुए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने अपनी वेबसाइट पर 26 पॉइंट्स में जानकारी दी है. RBI ने नोट बैन के पीछे फर्जी करंसी को सबसे बड़ा कारण बताया है. इस पोस्ट में ब्लैक मनी का भी जिक्र है और साफ कहा गया है कि लोगों के पास जितना पैसा है, उन्हें एक्सचेंज में पूरा पैसा मिलेगा. तो देखिए क्या बताया है RBI ने.

1. ये स्कीम क्यों लाई गई?

मार्केट में फर्जी नोट बहुत बढ़ गए हैं. इन्हें बनाने वाले किसी सिक्यॉरिटी फीचर की नकल तो नहीं कर पाए, लेकिन आम जनता असली और नकली नोट में फर्क नहीं कर पाती है. इन नोटों का यूज अवैध और एंटी-नेशनल कामों में हो रहा है. ब्लैक मनी छिपाने के लिए सबसे ज्यादा बड़ी कीमत वाले नोट ही यूज किए जाते हैं. भारत हमेशा से कैश-बेस्ट इकॉनमी रहा है और इसी वजह से फेक करंसी का खतरा ज्यादा है. इन्हें एक झटके में बाहर करने के लिए हजार और पांच सौ के नोट बंद करने की स्कीम लाई गई है.

2. क्या है स्कीम?

8 नवंबर, 2016 के आदेश के मुताबिक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा जारी किए गए 500 और हजार के नोट वापस मांग लिए गए हैं. इस आदेश की वजह से अब इन नोटों से कोई ट्रांजैक्शन नहीं किया जा सकता है. न ही इन्हें फ्यूचर में किसी तरह के यूज के लिए बचाया जा सकता है. इन नोटों को RBI के 19 ऑफिसों, किसी भी बैंक की किसी भी ब्रांच, किसी भी हेड पोस्ट ऑफिस या सब-पोस्ट ऑफिस से बदला जा सकता है.

notes

3. एक्सचेंज करने पर मुझे क्या कीमत मिलेगी?

नोट बदलने के लिए जो जगहें बताई गई हैं, वहां कोई भी नोट देने पर आपको उतना ही पैसा वापस मिलेगा. अगर आप पांच सौ की नोट देते हैं, तो बदले में आपको पांच सौ रुपए ही मिलेंगे.

4. क्या मैं सारा पैसा एक्सचेंज कर सकता हूं?

नहीं. एक्सचेंज करते समय आपको एक बार में चार हजार रुपए से ज्यादा कैश नहीं दिया जाएगा. अगर आप इससे ज्यादा कैश एक्सचेंज करना चाहते हैं, तो ये आपके बैंक अकाउंट में क्रेडिट किया जाएगा.

5. अगर मैं सारा पैसा कैश में सरेंडर कर रहा हूं, तो मुझे सारा पैसा कैश में क्यों नहीं मिल सकता?

ये स्कीम इसलिए लॉन्च ही नहीं की गई है. इसका उद्देश्य ऊपर (1) बताया जा चुका है.

6. मेरी जरूरत के हिसाब से चार हजार रुपए का कैश बहुत ही कम है. मैं क्या करूं?

दूसरी जरूरतों के लिए आप बैंक अकाउंट से पेमेंट कर सकते हैं. इसके लिए चेक और ऑनलाइन पेमेंट, जैसे नेट बैंकिंग, मोबाइल वॉलेट, IMPS ट्रांसफर और डेबिट-क्रेडिट कार्ड्स का यूज किया जा सकता है.

7. अगर मेरे पास बैंक अकाउंट नहीं है तो?

किसी भी बैंक ब्रांच में जाकर KYC जरूरतों के लिए जरूरी दस्तावेज देकर आप कभी भी अपना बैंक अकाउंट खुलवा सकते है.

8. अगर मेरे पास सिर्फ ‘जनधन योजना’ अकाउंट है तो?

जनधन योजना वाला अकाउंट रखने वाला कोई भी शख्स हजार और पांच सौ के नोट एक्सचेंज करवा सकता है. उस पर भी वही नियम और शर्तें लागू होंगी, जो दूसरे अकाउंट वालों के लिए बनाई गई हैं.

9. नोट एक्सचेंज करने के लिए मैं कहां जा सकता हूं?

RBI के किसी भी ऑफिस, कमर्शियल बैंक की किसी भी ब्रांच, स्टेट को-ऑपरेशन बैंकों, किसी भी हेड पोस्ट ऑफिस या सब पोस्ट ऑफिस में नोट एक्सचेंज कराए जा सकते हैं.

10. क्या मैं सिर्फ अपने बैंक की ब्रांच से नोट एक्सचेंज करवा सकता हूं?

चार हजार रुपए तक का कैश एक्सचेंज कराने के लिए आप किसी भी बैंक की किसी भी ब्रांच में जा सकते हैं. आपको बस एक सरकारी वैलिड आईडी प्रूफ साथ ले जाना होगा.

चार हजार से ज्यादा कैश एक्सचेंज कराने के लिए, जो सिर्फ बैंक अकाउंट के जरिए होगा, आपको उस बैंक की ब्रांच में जाना होगा, जिसमें आपका अकाउंट है. आप होम ब्रांच या उसी बैंक की किसी भी ब्रांच में जा सकते हैं.

अगर आप किसी ऐसे बैंक में जाना चाहते हैं, जिसमें आपका अकाउंट नहीं है, तो आपको एक वैलिड आईडी और अपने बैंक अकाउंट की जानकारी साथ ले जानी होगी, ताकि पैसा आपके अकाउंट में ट्रांसफर किया जा सके.

11. क्या मैं अपने बैंक की किसी भी ब्रांच में जा सकता हूं?

हां. आप अपने बैंक की किसी भी ब्रांच में जा सकते हैं.

12. क्या मैं किसी दूसरे बैंक की किसी भी ब्रांच में जा सकता हूं?

हां. आप किसी दूसरे बैंक की किसी भी ब्रांच में जा सकते हैं. ऐसे में आपको कैश एक्सचेंज कराने के लिए एक वैलिड आईडी प्रूफ और अपने अकाउंट की जानकारी ले जानी होगी, ताकि चार हजार से ज्यादा कैश इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर के जरिए आपके अकाउंट में ट्रांसफर किया जा सके.

13. मेरा कोई बैंक अकाउंट नहीं है, लेकिन मेरे रिश्तेदार/ दोस्त का बैंक अकाउंट है. क्या मैं अपने नोट उनके अकाउंट के जरिए एक्सचेंज कर सकता हूं?

हां. आपके जिस रिश्तेदार/दोस्त का बैंक अकाउंट है, अगर वो आपको लिखित इजाजत देता है, तो आप उसके अकाउंट के जरिए कैश एक्सचेंज कर सकते हैं. एक्सचेंज के दौरान आपको अपनी वैलिड आईडी और अकाउंट होल्डर से मिली लिखित इजाजत बैंक को दिखानी होगी.

14. क्या मुझे खुद बैंक जाना पड़ेगा या मैं किसी और को भेज सकता हूं?

अगर आप खुद ब्रांच जाते हैं, तो बेहतर होगा. अगर ऐसा मुमकिन नहीं है, तो आप इसकी लिखित जानकारी के साथ किसी और को भेज सकते हैं. एक्सचेंज के समय आपके प्रतिनिधि को वो लेटर और अपनी वैलिड आईडी दिखानी होगी.

15. क्या मैं ATM से कैश निकाल सकता हूं?

बैंकों को अपने ATM जांचने में थोड़ा वक्त लगेगा. जैसे ही ATM काम करने लगेंगे, आप उससे पैसे निकाल सकेंगे. 18 नवंबर तक आप ATM से एक दिन में अधिकतम दो हजार रुपए निकाल सकेंगे. 19 नवंबर से ये लिमिट बढ़कर चार हजार रुपए हो जाएगी.

16. क्या मैं चेक से कैश निकाल सकता हूं?

हां. आप विदड्रॉल स्लिप या चेक से कैश निकाल सकते हैं. ऐसे में आप एक दिन में अधिकतम 10 हजार रुपए और सप्ताह में अधिकतम 20 हजार रुपए निकाल सकते हैं. यानी अगर आप एक दिन 10 हजार रुपए निकालते हैं, तो बचे 6 दिनों में सिर्फ 10 हजार और निकाल सकेंगे. इस लिमिट में ATM से किया गया ट्रांजैक्शन भी शामिल होगा. ऐसा 24 नवंबर तक होगा और उसके बाद इन लिमिट्स का रीव्यू किया जाएगा.

17. क्या मैं ATM, कैश डिपॉजिट मशीन या कैश रीसाइकलर में नोट डिपॉजिट कर सकता हूं?

हां. नोटों को कैश डिपॉजिट मशीन/ कैश रीसाइकलर के जरिए डिपॉजिट किया जा सकता है.

18. क्या मैं पेमेंट के लिए इलेक्ट्रॉनिक मोड (NEFT/RTGS /IMPS/ इंटरनेट बैंकिंग/ मोबाइल बैंकिंग वगैरह) का यूज कर सकता हूं?

हां. आप किसी भी तरह के पेमेंट के लिए NEFT/RTGS /IMPS/ इंटरनेट बैंकिंग/ मोबाइल बैंकिंग वगैरह या किसी भी दूसरे इलेक्ट्रॉनिक/ नॉन कैश मोड का यूज कर सकते हैं.

19. नोट एक्सचेंज करने के लिए मेरे पास कितना वक्त है?

ये स्कीम 30 दिसंबर, 2016 को बंद होगी. नोट एक्सचेंज करने के लिए जो भी जगहें बताई गई हैं, वहां 30 दिसंबर तक नोट एक्सचेंज किए जा सकते हैं. जो लोग 30 दिसंबर तक नोट एक्सचेंज नहीं कर पाएंगे, उन्हें RBI के सीमित ऑफिसों में जरूरी दस्तावेज दिखाकर नोट एक्सचेंज करने का मौका दिया जाएगा.

20. मैं अभी भारत में नहीं हूं. मुझे क्या करना चाहिए?

अगर आपके पास भारत में हजार और पांच सौ के नोट हैं, तो आप लिखित इजाजत देते हुए भारत में किसी व्यक्ति को अथॉरिटी बना सकते हैं, जो नोटों को आपके बैंक अकाउंट में डिपॉजिट कर सके. ऑथराइज किए गए व्यक्ति को नोट, वैलिड आईडी प्रूफ और आपके लिखे लेटर के साथ बैंक ब्रांच जाना होगा. वैलिड आईडी प्रूफ के तौर पर आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आईडी कार्ड, पासपोर्ट, नरेगा कार्ड, पैन कार्ड या किसी सरकारी विभाग द्वारा जारी किया गया कार्ड दिखाया जा सकता है.

21. मैं NRI हूं और मेरे पास NRO अकाउंट है. क्या एक्सचेंज वैल्यू मेरे अकाउंट में ट्रांसफर की जा सकती है?

हां. हजार और पांच सौ के नोट आप अपने NRO अकाउंट में डिपॉजिट कर सकते हैं.

22. मैं विदेशी पर्यटक हूं और मेरे पास हजार और पांच सौ के नोट हैं. मैं क्या करूं?

इस नोटिफिकेशन के 72 घंटों के अंदर एयरपोर्ट एक्सचेंज काउंटर्स पर इन नोटों का यूज करते हुए आप पांच हजार रुपए के बराबर फॉरेन एक्सचेंज खरीद सकते हैं. इसके लिए आपको इन नोटों को खरीदने का मौजूदा प्रूफ दिखाना होगा.

23. मुझे इमरजेंसी (हॉस्पिटल, ट्रैवेल, लाइव सेविंग मेडिसिन) में कैश की जरूरत है. मैं क्या करूं?

सरकारी हॉस्पिटल में पेमेंट करते समय आप हजार और पांच सौ के नोट इस्तेमाल कर सकते हैं. सरकारी बस स्टैंड पर बस टिकट खरीदने, रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के टिकट खरीदने और एयरपोर्ट पर एयर टिकट खरीदने के लिए आप इन नोटों का इस्तेमाल कर सकते हैं. हालांकि, ऐसा नोटिफिकेशन आने के 72 घंटों तक ही किया जा सकेगा.

24. आईडी प्रूफ के तौर पर क्या दिखाना होगा?

इनमें से कोई भी एक वैलिड आईडी प्रूफ हो सकता है: आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आईडी कार्ड, पासपोर्ट, नरेगा कार्ड, पैन कार्ड, किसी सरकारी विभाग द्वारा जारी किया गया आईडी कार्ड.

25. इस स्कीम के बारे में और जानकारी मुझे कहां से मिल सकती है?

और जानकारी RBI की वेबसाइट (www.rbi.org.in) और भारत सरकार की वेबसाइट (www.finmin.nic.in) से ली जा सकती है.

26. अगर मुझे किसी तरह की कोई परेशानी है, तो मुझे किससे बात करनी चाहिए?

आप ईमेल के जरिए या टेलीफोन नंबरों 022 22602201/022 22602944 पर कॉल करके RBI के कंट्रोल रूम से संपर्क कर सकते हैं.

इन तस्वीरों को देखने के बाद आप पब्लिक प्लेस में कभी नहीं सोना चाहेंगे

आपने पब्लिक ट्रांसपोर्ट में यात्रा करते समय ऐसे कई लोगों को देखा होगा जिन्हें गाड़ी में बैठते ही पट से नींद आने लगती है. कई लोग सिनेमा हाल में बैठते ही सो जाते हैं तो कुछ लोगों को पार्क में ठंडी हवा लगते ही नींद आ जाती है.

ऐसे लोगों के ऊपर आसपास के शोरगुल, भीड़भाड़ का भी कोई असर नहीं पड़ता. उन्हें तो बस सोना है तो सोना है. आपको याद होगा अभी कल ही संसद में चर्चा के दौरान राहुल गाँधी सोते पाए गए थे.

बहरहाल, नींद आना अच्छी बात है पर पब्लिक प्लेस पर नहीं. सोते समय आप कैसी मुद्रा बनाते हैं, ये आपको भी होश नहीं रहता. उधर सोशल मीडिया और मोबाइल कैमरों का ज़माना है, लोग तस्वीर खींच लेते हैं, खामखाँ मजाक बन जाता है.

काले धन को परमानेंट काला ,और कैसे पड़ेगी गरीबो पर मार और क्या है इसके पीछे राजनैतिक षड्यंत्र

मोदी का कहना है अगर नोट बंद करने की जानकारी इसलिए गुप्त रखी गई ताकि काले धन वालो को मौका न मिल सके अपने पैसे ठिकाने लगाने का . खैर एक छोटी से बात जान लेते है अम्बानी मोदी का जीजा आर बी आई का गवर्नर , वाणिज्य मंत्री है का साला . तो मिया आपको लगता है की सारी सूचना एकदम गुप्त रखी गई थी या पहले से इन पूंजीपतियो को कह दिया गया था कि अपने धन को ठिकाने लगाने के लिए वाव्य्स्था कर ली गई थी ?? बिलकुल कर ली गई होगी

नोट बंद हो गए है अब इसकी सबसे बड़ी मार गरीबो और अनपढ़ लोगो पर पड़ रही है बहुत सारे छोटे छोटे दुकानदार अब ये नोट नहीं ले रहे है और जो जयादा धूर्त है वो लोगो को पांच सौ के बदले चार सो का सामान दे रहे है और लोग मजबूरी में ले रहे है , पट्रोल पम्प आदि पर सौ पचास का नोट यह कह कर नहीं ले रहे है की उनके पास चेंज नहीं है या तो सारे पैसो का सामान या पेट्रोल लो या नहीं मिलेगा

इसके अलावा बैंको में जमा कराने की प्रक्रिया भी काफी कठिन होगी सो पूंजीपति पहले से ही बैंक कर्मचारियो से मिल लिए है और एक लाख के बदले ५० -७० हजार पर डील तय हो गई है

इसके अलावा करंट अकाउंट माफिया बहुत जयादा सक्रिय हो गया है यानी ये पूंजीपति लोग छोटे मोटे कम्पनियो को पांच से दस लाख रूपये दे रहे है ताकि वो लोग अपने अकाउंट में पैसा डाल कर टैक्स आदि की अदायगी के बाद पचास से ६० % तक वापिस ले सके इसमें खाता धारक कम्पनी को बीस से तीस % की बचत हो जाएगी

अब यह समझ लेते है की यह घोषणा वैसे तो कभी भी हो सकती थी लेकिन यु पी पंजाब और अन्य राज्यों में आने वाले चुनाव से पहले ही क्यों की गई ?? इसका एक मुख्य कारण यह माना जा रहा है की यु पी चुनाव में समाजवादी और बहुजन समाज पार्टी के लोगो के पास जो कला धन होगा उसका इस्तेमाल न हो सके और सफ़ेद धन इनके पास सिर्फ रोटिया खाने के लिए ही है ऐसा भाजपा का मानना है और जिसका परिणाम यह होगा की ये लोग चुनाव प्रचार सही ढंग से नहीं कर सकेंगे और हार जाएंगे .. खैर यह तो वही बात है जैसे बिल्ली के ख्वाब में चिच्ड़े यानी भाजपा की यह मनसा कभी पूरी नहीं होगी . और ये लोग समझते है की ये लोग पुब्जिपतियो की मदद से पैसा खर्च कर चुनाव जित जाएंगे .

खैर इस प्रक्रिया से यह बात तो साबित हो गई है भाजपा देश को चलाने के हर क्षेत्र में फ्लॉप हो गई है , गरीबी बेरोजगारी , महंगाई को कम नहीं कर पाई है बल्कि भाजपा के पूंजीपतियो ने अपना सारा पैसा खर्च कर गेहू दाल , चीनी सब स्टोक कर लिया है और अब इन सामानों को दुगने दामो पर बेचेंगे और असल मुनाफ़ा कमायंगे
जनता के ध्यान को खींचने के लिए यह मोदी का एक विफल प्रयास है या कहे की एक षड्यंत्र है जो कभी सफल नहीं हो सकता और मोदी जिस काले धन को लाने की बात कर रहे थे उसमे भी विफल है और इससे देश के पूंजीपतियो को को फर्क नहीं पड़ेगा , बल्कि सिर्फ गरीब , मजदूर मारे जाएंगे

देख लीजिये किस तरह हड़कंप आता है

रात को यहां पहुंचे लोग

500 और हजार के नोट बंद होने से नौकरी वाले तो चिल्ड आउट हैं. लेकिन ‘हड़कंप’ अगर कोई चीज़ होती है तो वो उनमें मचा है जिनके पास ब्लैक मनी है.

‘ब्लैक मनी’ थोड़ा कंफ्यूज करने वाला टर्म है. ब्लैक मनी सिर्फ वो नहीं है जो घूस के तौर पर लिया जाता है. वो भी ब्लैकमनी है जिस पर टैक्स नहीं दिया जाता. आप जानते हैं कि अपने यहां बहुत सारे ‘बिजनेसमैन’ सिर्फ कैश में डील करते हैं. प्रॉपर्टी डीलर्स का तो सबका मालूम है.

तो हड़कंप इस तरह मचा कि जिनके पास खूब सारा रोकड़ा पड़ा है, वो टाइम की परवाह किए बिना बुधवार को जूलरी खरीदने पहुंच गए. कनॉट प्लेस के तनिष्क जूलर्स शोरूम पर रात 12:30 बजे जबरदस्त भीड़ थी. बहुत सारे लोगों ने अपने काले धन को सफेद बनाने के लिए सोने के ज़ेवर खरीदे. रात दो बजे तक लोग सोना खरीद रहे थे और काले धन को सफेद ही क्या, सुनहरा भी बना रहे थे.

तनिष्क वालों को इस स्थिति का अंदाजा रहा होगा, इसलिए उन्होंने देर रात तक अपना शोरूम खुला रखा. मीडिया को देखकर सिक्योरिटी गार्ड्स ने शटर गिरा दिया. 2 घंटे बाद शटर खुला और 50 से ज्यादा लोग हौले से वहां से निकल लिए.

मीडिया ने उनसे बात करने की कोशिश की, लेकिन सब मुंह चुराकर अपनी कार की ओर बढ़े और वहां से निकल लिए. कुछ कारों पर तो NDMC के ऑफिशियल स्टिकर्स भी लगे हुए थे.